4100 महिलाओं ने निकाली कलश यात्रा

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भागवत कथा का किया शुभांरभ

फतेहपुर, (शंकर कटारिया) बुधगिरी मढ़ी में चल रही भागवत कथा का आज प्रथम दिन था। भागवत कथा से पूर्व विशाल कलश यात्रा आयोजित की गई जिसमें आसपास के क्षेत्रों से आई हुई 4100 महिलाओं ने अपने मस्तक पर कलश धारण करके विशाल कलश यात्रा निकाली। बालाजी मंदिर से शुरू हुई यात्रा की पूर्णता भागवत कथा स्थल पर हुई। जानकारी देते हुए कार्यक्रम के मीडिया प्रभारी संदीप शर्मा और विष्णु पारीक ने बताया कि राजस्थान गौ सेवा समिति के प्रदेशाध्यक्ष, महंत दिनेशगिरी महाराज ने व्यासपीठ से अपने मधुर कोकिल कण्ठों से कथा का महत्व व प्रारंभिक दिन की कथा सुनाई। महाराज श्री ने भागवत के प्रारंभिक बिंदुओं को लेते हुए ज्ञान भक्ति और वैराग्य को मुख्य रूप से इंगित किया और सभी से आव्हान किया की भक्ति में यदि ज्ञान का पुट नहीं होगा, भक्ति में यदि विवेक का प्रयोग नहीं होगा तो वह भक्ति व्यभिचारिणी भक्ति कहलाएगी। धुंधकारी के माध्यम से महाराज ने परिवारों में घटते संस्कारों पर जोर दिया, समाज में व्याप्त कुरीतियों, रूढ़ियों और मूढ़ मान्यताओं से भी समाज को मुक्त किए जाने की बात कही। कथा में भारी संख्या में उपस्थित लोगों से महंत दिनेश गिरी जी ने व्यासपीठ से गोकर्ण जी की कथा कही और भक्तों से कहा कि गाय के गर्भ से उत्पन्न होने के बावजूद भी गोकर्ण जी का जीवन सात्विकता से परिपूर्ण था, ऐसा ही जीवन भारतीयों का बने यह बहुत आवश्यक है।राजा परीक्षित के माध्यम से उन्होंने बताया कि गलत प्रकार से अर्जित किए गए धन का कोई भी साधन हमारे लिए त्याज्य है क्योंकि राजा परीक्षित के सर पर भी कलयुग का प्रभाव जरासंध के मुकुट को पहनने से हुआ। भागवत कथा के पहले दिन विभिन्न स्थानों से पधारे संत महंतों का सम्मान किया गया। इस अवसर परमहंस हिरापुरी महाराज, थानापति कला डूंगरी, महंत नरसिंह पूरी महाराज उदयपुरिया मठ, महंत मनोहरशरण महाराज पलसाना, महंत रघुनाथ भारती महाराज बाड़मेर, महावीर जति महाराज शिवमठ गाड़ोदा, महंत रामप्रपन्नाचार्य महाराज गनेड़ी, महंत दयालगिरी महाराज शेख़ीसर डॉ आर जी शर्मा, विजय कुमार निर्मल, भवरलाल शर्मा हठवास, जयकांत नागवान,शीतल पीपलवा, ताराचंद गुजर, अधिवक्ता पंकज, महेंद्र थालोर, ओमप्रकाश सोनी, बनवारी लाल जांगिड़, बंशीधर रिणवा, सांवरमल सुरेश काछवाल, बुधरमल गढ़वाल, सोमराज नायक, गोपाल महाराज, दीपक पीपलवा सहित अनेक भक्तजन मौजूद थे।

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