बस स्टैंड मामला, आ गई अकल ठिकाने !

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बड़े दिनों बाद देखने मिली प्रशासनिक दृढ़ इच्छा शक्ति

यह दृढ़ इच्छाशक्ति है दुनिया बदल सकती है यह बात हाल ही में पुराने बस स्टैंड को नए स्थान पर स्थानांतरित करने के मामले में जिला कलेक्टर रवि जैन के ऊपर सटीक बैठती है। वर्षों से बस स्टैंड को स्थानांतरित करने का मुद्दा लटका हुआ था इस मुद्दे में न तो किसी बड़े प्रशासनिक अधिकारी ने और ना किसी राजनेता ने हाथ डालने की हिम्मत दिखाई लेकिन वर्तमान जिला कलेक्टर रवि जैन ने अपनी प्रशासनिक कार्य कुशलता दिखाते हुए दृढ़ इच्छाशक्ति के सहारे इस काम को बखूबी कर दिखाया है, काम को कर ही नहीं दिखाया बल्कि इतनी बखूबी से करके दिखाया है कि जनता के अंदर एक मैसेज गया है कि यह बिना वर्दी वाला सिंघम है। गौरतलब है कि बस ऑपरेटर यूनियन वाले बस स्टैंड स्थानांतरित के विरोध करने के विरोध को लेकर 4 दिन से हड़ताल पर थे लेकिन जिला कलेक्टर रवि जैन ने अपनी प्रशासनिक कार्य कुशलता व दृढ़ इच्छाशक्ति को दिखाते हुए अपने फैसले को कायम ही नहीं रखा बल्कि बस यूनियन के ऑपरेटरों को उल्टे पांव अपने स्थान पर लौटना पड़ा। और लौटे भी क्यों नहीं आज जो बस ऑपरेटर यूनियन के लोग दुहाई दे रहे हैं कि ग्रामीण जब बाहर से आएंगे उनको अतिरिक्त टैक्सी चार्ज लगेगा तो वही हम आपको बता दें कि ग्रामीण रूटों पर चलने वाली इन बसों में प्रशासन द्वारा निर्धारित किराए से अधिक राशि तो वसूल की जाती है ही साथ में ही एक मनमानी और अभद्रता भी की जाती है ऐसे में पिछले तीन-चार दिनों से बस यूनियन के लोगों की जो बोल ग्रामीण हितों में निकल रहे थे तो ऐसा लगा कि वास्तव में अच्छे दिन आ गए हैं। लेकिन यह मृगमरीचिका थी। जिला कलेक्टर की ग्रामीण क्षेत्रो के लिए की गई रोडवेज की वैकल्पिक व्यवस्था ने बस यूनियन की हालत लौट के बुद्धू घर को आये जैसी कर दी। विकास का पहिया परिवर्तन के पथ पर ही गतिशील होता है। विकास के चाहने वाले अपने निजी हितो से ऊपर उठ कर कार्य करते है। वही झुंझुनू के युवाओ ने भी इस मुद्दे पर साफ संकेत दे दिया है कि सकारात्मक और अच्छी पहल यदि प्रशासन के द्वारा भी की जाती है तो वो उसमे में भी पूरी ईमानदारी से भूमिका निभाते है। आज का युवा सिर्फ विरोध के लिए विरोध करने के पक्ष में बिलकुल भी नहीं है। इसे देखकर लगता है कि वास्तव में मेरा देश बदल रहा है।

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