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लेख

डॉ. शंकर चौधरी [लेख ] — कुत्ते का टिकाकरण कलेण्डर

कुत्ता सबसे पुराना पालतू जानवर है, परन्तु कुछ जूनोटिक बीमारियों का खतरा भी इससे जुडा हैं| घर का पालतू, छोटे बच्चों के साथ भी खेलता रहता है| ऐसे में बच्चे और बड़े सभी कुत्ते की लार इत्यादि स्त्रवणो के संपर्क में आते रहते है| अतः…

भेड़ पालन – वैज्ञानिक प्रबंधन

पशुगणना 2012 के अनुसार राजस्थान में लगभग 90 लाख भेड़े हैं| राजस्थान में पाई जाने वाली भेड़ों की मुख्य नस्लों में चोकला, मगरा, नाली, सोनाडी, मारवाड़ी, मालपुरा और जैसलमेरी प्रमुख हैं| भेड़ पालन के लिए सबसे महत्वपूर्ण बिंदु हैं- चारागाह का…

पशुओं के लिए प्रोटीन स्त्रोत : यूरिया मोलासेस उपचारित चारा

राजस्थान की शुष्क जलवायु और अकाल की समस्या के कारण पशुओ के लिए वर्षभर हरा चारा उपलब्ध नहीं हो पाता है, एवं जो सुखा चारा उपलब्ध होता है उसकी पोष्ठिकता कम होती है और अधिक उत्पादन वाले पशुओ में पोषक तत्वों की पूर्ति नहीं हो पाती है तथा पशु…

हरे चारे का “हे” और “साइलेज” के रूप में संग्रहण

‘हे’: एक परिचय ‘सूखा हरा चारा’ जिसमे शुष्क पदार्थ लगभग 85-90 %,रंग हरा और पत्तियों की अधिक मात्रा हो उसे हे कहते है |’हे’ में नमी की मात्रा 12-14 फीसदी से अधिक नहीं होनी चाहिए ताकि इसको किण्वन और कवक संक्रमण से बचाया जाकर  सुरक्षित…

बारिश मे पशुओं मे होने वाले रोग-बचाव एवं उपचार  

बारिश का मौसम शुरू हो चुका हैं| इस मौसम मे पशुओं मे मुख्यतया निम्न रोग अधिक देखे जाते हैं- फूट-रॉट/ खुर-गलन- बारिश के पानी मे खड़े रहने से पशुओं के खुर गल जाते हैं| ये जीवाणु जनित रोग हैं जिसमे खुरों मे घाव और अल्सर हो जाते हैं|…

वर्षा ऋतु मे पशु आहार एवं प्रबंधन

वर्षा ऋतु मे पशुओं की आहार व्यवस्था- पशुओं के दाने-चारे के बारिश मे भीग जाने पर उसमे फंगस लग जाती हैं, ऐसा दाना-चारा पशुओ को नही देना चाहिए| बारिश के बाद हरा चारा प्रर्याप्त मात्रा मे उपलब्ध हो जाता है, परंतु हरे चारे को कटाई मशीन से…

मानसून पूर्व गाय-भैंस का टिकाकरण करवाना फायदेमंद

मानसून आते ही गाय-भैंस में गलघोटू और लंगड़ा बुखार  रोग का प्रकोप देखा जाता है| अतः सभी पशुओ का मानसून से पूर्व ही गलघोटू और  लंगड़ा बुखार रोग से बचाव के लिए टीकाकरण आवश्यक रूप से करवा लेवे| गलघोटू और लंगड़ा बुखार रोग को निम्न लक्षणों के…

पशुपालन – नवजात बछडा या बछडी का आहार प्रबन्धन

नवजात बछडे या बछडी को दिया जाने वाला सबसे पहला और सबसे जरूरी आहार है मां का पहला दूध, अर्थात् खीस। खीस का निर्माण मां के द्वारा बछडा या बछडी के जन्म से 3 से 7 दिन बाद तक किया जाता है और यह बछडा या बछडी के लिए पोषण और तरल पदार्थ का…

भेड़-बकरियों मे होने वाले रोग और उनसे बचाव का तरीका

भेड़-बकरियों में मुख्यतया फड़कीया, कन्टेजियस-इक्थाईमा, पी.पी.आर. और पॉक्स रोग का प्रकोप अधिक पाया जाता हैं| -:फड़कीया:- फड़कीया रोग का रोगकारक “क्लॉस्ट्रीडियम परफ्रीजेंस टाइप-डी” होता हैं| इस रोग में भेड़-बकरी का चक्कर काटना, शरीर में…

पशुओं में मुंहपका-खुरपका रोग को पहचानिये

“मुंहपका-खुरपका रोग” एक ज़ूनोटिक रोग हैं जो पशुओं से मनुष्यों में भी फ़ैल सकता हैं|मुंहपका खुरपका रोग विषाणु (पिकोरना वायरस) जनित संक्रामक रोग हैं जिसका फैलाव हवा द्वारा, या बीमार पशु के झूठे पशुआहार, पानी और दूषित पदार्थो के संपर्क में…

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