राजलदेसर (चूरू)। निकटवर्ती ग्राम बण्डवा के ग्रामीणों ने क्षेत्र में प्रस्तावित सोलर प्लांट के लिए संभावित पेड़ कटाई का विरोध करते हुए तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए हरे पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने की मांग की है।
400 बीघा भूमि पर प्रस्तावित है सोलर प्लांट
ग्रामीणों द्वारा दिए गए ज्ञापन में बताया गया है कि बण्डवा के खोवा रोही क्षेत्र में लगभग 400 बीघा भूमि पर सोलर प्लांट स्थापित किए जाने की जानकारी मिली है।
ग्रामीणों का कहना है कि चिन्हित क्षेत्र में वर्तमान में करीब 1200 से 1400 खेजड़ी और रोहिड़ा के हरे-भरे पेड़ मौजूद हैं, जो स्थानीय पारिस्थितिकी और पर्यावरण संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
पर्यावरण पर असर की जताई चिंता
ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि सोलर प्लांट की स्थापना के दौरान इन पेड़ों की कटाई की जाती है, तो इसका प्रभाव केवल बण्डवा ही नहीं बल्कि आसपास के पूरे क्षेत्र के पर्यावरण और मौसम चक्र पर पड़ सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि खेजड़ी और रोहिड़ा जैसे पेड़ मरुस्थलीय क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण, पशुओं के चारे और भूजल संतुलन के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
“विकास जरूरी है, लेकिन पर्यावरण की कीमत पर नहीं। हरे पेड़ों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।” ग्रामीणों का पक्ष
प्रशासन को दी आंदोलन की चेतावनी
ज्ञापन में ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि समय रहते पेड़ों की कटाई पर रोक नहीं लगाई गई, तो गांव के लोग बड़े स्तर पर जनआंदोलन शुरू करेंगे।
ग्रामीणों ने कहा कि ऐसी स्थिति में किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था संबंधी परिस्थिति की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे मौजूद
ज्ञापन सौंपने के दौरान सांवरमल ढाका, कामरेड भादर भाम्भू, श्रवण बारूपाल, कालूराम मेघवाल, श्रवण सिंह, गोपालराम, सतवीर सिंह, भागीरथ, भगवाना राम, नारायण राम, मुरलीधर, बजरंगलाल, दुर्जन सिंह, नोरगराम और मदनलाल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
पर्यावरण बनाम विकास पर छिड़ी बहस
बण्डवा में प्रस्तावित सोलर प्लांट को लेकर अब पर्यावरण संरक्षण और विकास परियोजनाओं के बीच संतुलन बनाए रखने की चर्चा तेज हो गई है। ग्रामीणों की मांग है कि यदि परियोजना लगानी ही है तो ऐसे विकल्प तलाशे जाएं जिनसे पेड़ों को नुकसान न पहुंचे।





