दांतारामगढ़ हुआ 350 वर्ष का

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स्थापना दिवस कल

दांतारामगढ़ [ संकलनकर्ता : लिखासिंह सैनी,प्रदीप कुमार सैनी ] इतिहास के पीले पड़ गए पन्नों में सब लिखा हैं । दांता ग्राम पहले पंचगिरी के नाम से जाना जाता था क्योंकि यहां पर पांच पर्वत हैं । बाद में दातली तलाई के नाम से जाना जाने लगा और फिर दांता के नाम से प्रसिद्ध हुआ । दांता  सीकर जिले की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत हैं । दांता सीकर से भी 18 साल पहले दांता के नाम से बस चुका था। दांता को आज से 350 वर्ष पूर्व विक्रम संवत 1726 में आखातीज को ठा. अमरसिंह ने दांता के नाम से बसाया था । दांता संस्थापक  ठा. अमरसिंह से लेकर अंतिम शासक ठा. मदनसिंह तक 16 राजाओं ने राज किया । दांता के संस्थापक ठा. अमरसिंह की मृत्यु के बाद उनके पुत्र  रतनसिंह राजा बने । उसी काल में उन्होंने दांता में नृसिंह भगवान व हनुमान मंदिर बनवाये थे। विक्रम संवत  1795 में पहाड़ पर गढ़ का निर्माण करवाया था । ठा . रतनसिंह की मृत्यु के बाद उनके पुत्र गुमानसिंह राजा बने जो जयपुर के महाराजा सवाई जयसिंह के प्रतिष्ठित एवं कृपापात्र सरदार थे । ठा. गुमानसिंह बड़े दानी थे l पांच गांव का पट्टा बनाकर पाखर में रखकर पांच चारण काव्यों को दान में दिया था । ठा . गुमानसिंह ने छः विवाह किये थे । उनकी निःसंतान मृत्यु होने पर उनके अनुज रायसिंह जो जाना चले गये थे उनके ज्येष्ठ पुत्र सवाईसिंह को दांता का राजा बनाया । सवाईसिंह के चार रानियां एवं दो पुत्र भवानीसिंह व माधोसिंह को जागीर में ग्राम सुरेरा दिया गया । ठा. सवाईसिंह की मृत्यु के बाद उनके ज्येष्ठ पुत्र भवानीसिंह राजा बने । जिन्होने विक्रम संवत 1811 में नीचे वाला गढ़ बनवाया । भवानीसिंह ने दांता में मरहटा मल्हारराव से युद्ध किया था । भवानीसिंह अपने समय के वीर प्रसिद्ध व्यक्ति थे । इनके दो रानियां व तीन पुत्र थे इनकी मृत्यु के बाद उनके ज्येष्ठ पुत्र हरिसिंह राजा बने  । उनके दो पुत्र थे l इनकी मृत्यु के बाद उनके ज्येष्ठ पुत्र अमानीसिंह राजा बने । अमानीसिंह ने श्रावण शुक्ल पूर्णिमा विक्रम संवत् 1837 में मुगल सेना से अपने पुत्र व भाईयो के साथ व  खाटूश्यामजी के महन्त मंगलदास के साथ मिलकर मुगलो से युद्ध किया । भयंकर रक्तचाप के बाद मुगल सेना पराजित होकर भाग गई । युद्ध में मंगलदास वीरगति को प्राप्त हुए। अमानीसिंह की मृत्यु के बाद उनके पुत्र नवलसिंह राजा बने । इनके दो पुत्र थे शार्दुरसिंह व बलवंतसिंह । ठा. नवलसिंह की मृत्यु के बाद उनके ज्येष्ठ पुत्र ठा. शार्दुरसिंह राजा बने । ठा.शार्दुरसिंह ने अपनी सेना जोधपुर के महाराजा मानसिंह को भेजकर  उनकी सहायता की थी जिसके फलस्वरूप विक्रम संवत् 1884 में ठा. शार्दुरसिंह को नागौर परग्ने का ग्राम भदाणा जागीर में प्रदान किया था । शार्दुरसिंह की निःसंतान मृत्यु होने पर उनके अनुज बलवंतसिंह राजा बने जिनकी अल्पायु में ही मृत्यु हो गई । उसके बाद ठा. बलदेवसिंह व ठा. रामनाथसिंह राजा बने इनकी मृत्यु के बाद ठा.उदयसिंह दांता के राजा बने l उनकी स्मृति में 115 खभों की एक विशाल छतरी बनी हुई हैं । इन्होंने उदयबिहारी जी का मंदिर भी बनवाया था । उदयसिंह की मृत्यु के बाद ठा. प्रेमसिंह राजा बने जो इससे पूर्व जयपुर राज्य की अपीलांट कोर्ट में जज रहे थे । ठा. प्रेमसिंह ने जयपुर में दांता हाऊस बनवाया था । करणीकोट माला पर शिकारगाह व प्रेम सरोवर तालाब बनवाया था । साथ ही ग्राम में बड़े तालाब का निर्माण भी करवाया था । ठा.प्रेमसिंह की निःसंतान मृत्यु होने के बाद ग्राम सुरेरा के ठा. सुखदेवसिंह के पुत्र ठा.गंगासिंह विक्रम संवत् 1985 में दांता के राजा बने । इनके छः पुत्र थे l बड़े पुत्र केशरीसिंह की मृत्यु ठा. गंगासिंह के समय ही हो चुकी थी । ठा. गंगासिंह की मृत्यु के बाद ठा. मदनसिंह दांता के राजा बने । आप सवाईमान गार्ड में कम्पनी कमांडर थे तथा दूसरे विश्व युद्ध में वीरतापूर्ण साहस के साथ शत्रु पर आक्रमण कर विजय प्राप्त की थी। जागीर समाप्ति तक आप दांता के राजा रहे थे । दांता संस्थापक के मदनसिंह अपने पूर्वज अमरसिंह से सोलहवीं पीढ़ी पर थे । ठा. मदनसिंह भू-स्वामी आन्दोलन के अध्यक्ष रहे थे एवं दांतारामगढ़ विधानसभा क्षेत्र के तीन बार विधायक रहे थे। ठा. मदनसिंह को राजऋषि की उपाधि प्राप्त थी । मंदिरों की नगरी दांता में पांच दर्जन मंदिर हैं । अधिकांश मंदिर प्राचीन है । महाभारत कालीन श्री खेड़ापति बालाजी धाम की मूर्ति को भीम ने बाईस हाथ खोदकर निकाली थी । काली माता मंदिर, गोपीनाथ मंदिर, सीतारामजी मंदिर, बाबा रामदेव मंदिर, बाबा परमानन्द मंदिर, सूर्य पुत्र शनिदेव मंदिर, कल्याणजी मंदिर, सन्तोषी माता मंदिर, जैन मंदिर सहित कई मंदिर हैं l जैन मंदिर नीचे वाला सन् 1735 में बनाया गया था । गांव में दादूबाग, जयपाल गिरी, बागवाली बगीची, निम्बार्क आश्रम, पीर बाबा की दरगाह है। गांव में दो प्राचीन जुम्मा मस्जिद और मदीना मस्जिद हैं । शिक्षा के क्षेत्र में दांता में आजादी से पूर्व ही सन् 1935 में वरनाकुलम मिडिल स्कूल था जिसका निर्माण नृसिंहदास हीरालाल बाईस्या ने करवाया था l इसके बाद सन् 1951 मे सैकण्डरी स्तर तक क्रमोन्नत होने पर नौकरी ब्रॉदर्स के इन्द्रचन्द्र हरिनारायण खेतान ने भवन उपलब्ध कराया । स्कूल के बच्चों के लिए खेल मैदान की 13 बीघा जमीन मय चार दीवारी निर्माण भींवराज बद्रीनारायण खेतान द्वारा प्रदान की गई थी । मुरारीलाल पुत्र हरिनारायण खेतान द्वारा राजकीय सीनियर बालिका विद्यालय का निर्माण करवाया था एवं विद्यालय नं.तीन का निर्माण श्री हीरालाल किरोड़ीवाल ने करवाया था । हुक्मा की स्कूल का निर्माण श्री हुक्माराम उज्जीवाल ने करवाया । खेतान पार्क का निर्माण भैरवदत्त ने करवाया था । भ्रातृ मण्डल के द्वारा शास्त्री छात्रावास जिसमें अभी पुलिस चौकी है, प्राथमिक शाला नम्बर एक एवं वालीबॉल खेल मैदान का निर्माण करवाया था ।  दांता मे चिकित्सालय सुविधा सन् 1926 में क्षेत्रीय समाज सेवी संस्था भ्रातृ मण्डल के प्रयासो से आयुर्वेद चिकित्सालय की स्थापना की गई थी । दूसरा चरण राजकीय रेफरल अस्पताल का निर्माण सेठ राम जीवण मदनलाल चितावत ने करवाया था जिसका उद्घाटन 21 नवंबर सन् 1989 को हुआ था ।  गोपाल गौशाला दांता की स्थापना गौपाष्टमी पर्व पर सन्  1947 मे सेठ श्री गंगाबक्स जैलिका प्रवासी रांची के द्वारा अपना भवन दान करने पर हुई थी । दांता बस उद्योग के जन्मदाता व ग्राम के पहले ड्राइवर जनाब मौलाबक्स चौबदार थे जो सन् 1937 में मुम्बई से ड्राईवर का प्रशिक्षण लेकर दांता आये थे उसके बाद सन् 1946 में कलकत्ता से 450 रूपए मे सवारी गाड़ी खरीद कर लाये थे । इस्लाम धर्म में सबसे पहले हज यात्रा पर वकील हाजी मोहम्मद इलाही चौबदार  थे इन्होंने सन् 1915 में हज की थी l इनके बाद हाजी इमाम बक्स लौहार ने हज यात्रा की थी । श्री कालूराम बगरानिया ने सन् 1973  में  मुम्बई में तीन लोगों की जान बचाने पर भारत सरकार द्वारा उत्तम जीवन रक्षा पदक पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।देश विदेश में ख्याति प्राप्त कृषि वैज्ञानिक सुंडाराम वर्मा ने पेड़ लगाने की ऐसी तकनीक विकसित की जिसमें पौधे को लगाने के लिए पूरे जीवन मे केवल एक लीटर पानी की आवश्यकता होती है । इस तकनीक के कारण सुंडाराम प्रसिद्ध है तथा इसी तकनीक का नाम सुंडाराम तकनीक भी रखा गया है ।नेवी मचेंट में प्रवीणसिंह देश विदेश में भी सेवाएं प्रदान कर चुके हैं, नरेन्द्रसिंंह हेंडबॉल नेशनल टीम के  कोच है। क्षितिज  कुमार तीन दशक से फिल्मों में अभिनय कर रहे हैं l इनके अलावा गांव में और भी कई कलाकार हैं । दांता के 11 वर्षीय धीरज ने विश्व योगा बुक में नाम दर्ज कराया । दांता सन् 1952 से 1961 तक नगरपालिका रही थी उसके साथ निकटवर्ती गांवों के राजस्व ग्राम अलग होने से दांता सन् 1961 में पंचायत बन गई जो आज तक पंचायत ही है, कई बार फिर से नगरपालिका बनाने के लिए प्रयास किये गए परंतु बात नही बनी । राजनीति में दांता नगरपालिका के प्रथम चैयरमेन मूलचंद छाबड़ा सन्  1952 में, विधायक ठाकुर मदनसिंह सन् 1957 में, प्रथम सरपंच केशरीमल काशलीवाल सन् 1961 में, गोपाल वैद्य सन्  1961 दांतारामगढ़ के प्रधान रहे l जगदीश प्रसाद वैद्य सन्  1964 से 1977 तक प्रधान रहे । श्रीमती सुवादेवी पहली महिला सरपंच सन् 1995 में, जिला परिषद सदस्य राजेश चेजारा सन् 2005 में रहे । दांता कस्बे का कुल रकबा 1732,88 हेक्टेयर है तथा जनसंख्या लगभग पचीस हजार हैं l कस्बे में कुल वार्ड 29 हैं l दस आंगनबाडी केंद्र  हैं l दांता का विद्युतीकरण सन् 1960 में हुआ था तथा 21 अगस्त सन् 1968 में प्राकृतिक विपदा बाढ़ का  प्रकोप हुआ था । झाड़ली तलाई मोड़ पर 11 अगस्त सन् 1989 को दो वाहनों की टक्कर स ग्राम में दशहरे की शुरुआत गोपीचंद कासलीवाल ने की एवं  श्री खेड़ापति बालाजी धाम में  मेले की शुरुआत सूरत प्रवासियो ने की थी । कस्बे में भगत सिंह की शहादत पर वालीबॉल प्रतियोगिता की शुरुआत तीन दशक पूर्व माकपा कार्यकर्ताओ द्वारा की गई थी । ठाकुर मदनसिंह मार्केट व श्री खेडा़पति बालाजी मंदिर में दो दशक पूर्व भक्तगणों द्वारा दुर्गा पूजा की शुरुआत की गई थी । कस्बे के कई लोग उच्च पदों पर है तो कई लोग देश विदेश में अपना व्यवसाय करतें है । कस्बे के भामाशाह ग्राम विकास के कार्य में हमेशा सहयोग करते हैं । दांता आस-पास के गांवो में बसो के लिए प्रसिद्ध है । दांता स्थापना के 350 साल व आजादी से सात दशकों बाद भी कई मुलभुत सुविधाओं से वचिंत है । स्थापना दिवस पर हम सभी दांता ग्रामवासी संकल्प करें तो सभी सुविधायुक्त, हराभरा ,साफसुथरा व स्वच्छः दांता बन सकता है।

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