डॉ मोदी ने की स्कूलों को कोरोना वायरस से उत्पन्न संकट से उबारने की मांग

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प्रधानमंत्री सहित राजस्थान सरकार को पत्र लिखकर

झुंझुनू, प्राइवेट स्कूलों के देश के सबसे बड़े संगठन नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल्स अलायंस (निसा) के राजस्थान प्रांत के प्रांतीय अध्यक्ष एवं जीवेम एज्युकेशन चेयरमैन डॉ दिलीप मोदी ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा, राज, माध्यमिक शिक्षा बोर्ड सचिव को एक पत्र लिखकर बजट प्राइवेट स्कूलों के हित में मांग की है। इस पत्र में डॉ मोदी ने निसा की ओर से सरकार से मांग की है कि आगामी महीनों के लिए स्कूल फीस माफी से संबन्धित कोई भी आदेश केन्द्र तथा राज्य सरकार द्वारा जारी नहीं किए जाएं तथा साथ ही मांग की है कि कई सालों से लंबित आरटीई की बकाया राशि का भूगतान कर कोरोना वायरस से उत्पन्न संकट से बजट प्राइवेट स्कूलों एवं अभिभावकों को इस संकट से उबारे । डॉ मोदी ने अपने पत्र में लिखा है कि कोरोना कारण निजी स्कूलों खासकर बजट प्राइवेट स्कूलों के सामने आर्थिक संकट पैदा हो गया है। उन्होने लिखा है कि देश में पांच लाख से अधिक निजी स्कूलें हैं जो करोड़ों गरीब छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहे है। इन स्कूलों पर 2 करोड़ से अधिक शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की आजीविका निर्भर करती हैं। डॉ मोदी ने आगे लिखा है कि कुछ संगठनों ने अपने निहित स्वार्थों के तहत स्कूल फीस में माफी की मांग करनी प्रारंभ कर दी है जबकि दूसरी तरफ स्कूल अपने कर्मचारियों को वेतन प्रदान करने की दिशा में पहले से ही चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। डॉ मोदी ने कहा कि कुछ बहुत बड़े स्कूलों को छोड़कर अन्य बजट स्कूलों में स्कूल फीस के अतिरिक्त कोई आय नहीं होती तथा ना ही स्कूल फीस के अतिरिक्त कोई बचत ही होती है और ऐसी स्थिति में यदि सरकार स्कूल फीस माफ करने का आदेश जारी करती है तो स्कूलों को अपने अस्तित्व को बचा पाना ही मुश्किल हो जाएगा। डॉ मोदी ने अपने पत्र में लिखा है कि फीस माफ़ करने की बजाय सरकार द्वारा डाईरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर (डी वी टी) के माध्यम से विद्यार्थियों के खाते में या स्कूलों के खातों में स्कूल फीस की सकती है। एक समान राशि जमा करवाकर गरीब और जरूरतमंद छात्रों एवं अभिभावकों की सहायता की जा सकती है। पत्र में आगे लिखते हुए निसा प्रांतीय अध्यक्ष ने सरकार से मांग की है कि जुलाई 2020 तक समस्त प्राइवेट स्कूलों को स्कूल वों की इलयारेंस की किश्तों में एवं ईपीएफ, ई एस आई, रोड टैक्स, स्कूल बस टैक्स, प्रोपर्टी टैक्स, बिजली एवं पानी के बिलों इत्यादि में भी छूट दी जाए। उन्होनें सरकार से निवेदन किया है कि इस सम्बन्ध में राज्य के विभिन्न संबन्धित विभागों में शीघ्र ही निर्देश दिए जाएं एवं प्राइवेट स्कूलों को राहत प्रदान की जाए। साथ ही विद्यार्थियों के हितों एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से हाँ मोदी ने सरकार से मांग की है कि सत्र 2020-21 के लिए एक नए एकेडमिक कैलेण्डर जारी किया जाए जिसमें सरकार द्वारा प्रदत्त अवकाश के सीमित रखा जाए जिससे कि स्कूलें कम से कम कुल 220 दिन सुचारू रूप से चलाएं जा से । डॉ मोदी द्वारा की गई इन मांगों का सभी बजट प्राईवेट स्कूलों ने समर्थन किया है तथा इसे बजट प्राइवेट स्कूलों के साथ-साथ अभिभावकों एवं विद्यार्थियों के हितार्थ बताया है।

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