द्वितीय विश्वयुद्ध से लेकर आजतक तीन पीढियों से कर रहे है देश सेवा

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दांता का ऐतिहासिक रामबाग बना शिक्षा की नगरी

दांतारामगढ़ (लिखासिंह सैनी) दांता के ऐतिहासिक रामबाग का निर्माण दांता के 12 वें  राजा शासक ठाकुर रामनाथसिंह ने एक सौ पचास साल पहले करवाया था । एक सौ दस बीघा भूमि पर चारों और अच्छी से अच्छी किस्म के पेड़-पौधों व फूलों के वृक्ष लगाये थे । शेष जगह खेतीबाड़ी होती थी । रामबाग में दो प्राचीन तीन-चार मंजिला महल हैं । जिसमें स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद ठाकुर गंगासिंह दांता के पुत्र ठा. मदनसिंह दांता के अनुज भ्राता ठाकुर हेमसिंह जिनको विरासत में ग्राम राजपुरा की  जागीर मिली थी फिर दांता आने पर रामबाग में रहने लगे । इनके पुत्र ठा. अमरसिंह भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे चुके है । रामबाग का दूसरा महल ठा. अजीतसिंह को मिला । इससे पहले ठा. अजीतसिंह को जागीर में बेणियां का बास मिला था । ठा.अजीतसिंह ने मैयो कॉलेज अजमेर में शिक्षा प्राप्त करने के बाद स्वतंत्रता पूर्व लंदन में भी शिक्षा प्राप्त की थी । ठा.अजीतसिंह भारतीय सेना में कम्पनी कमांडर थे । इनके पुत्र ठा. प्रवीणसिंह भी भारतीय नेवी व मर्चेंट नेवी अफ्रीका, यूरोप में चीफ इंजीनियर के पद पर कार्य कर चुके हैं, इनके दो पुत्रियां बाईसा शीतल कंवर व बाईसा शिवानी कंवर और एक पुत्र कुंवर किर्तीराज सिंह मर्चैंट नेवी में है इनके बड़े दादा ठा.मदन सिंह जयपुर की सवाई मान गार्ड के द्वितीय लेफ्टिनेंट के पद पर रहते हुए द्वितीय विश्वयुद्ध में तीन सालों तक युरोप में युद्ध लडा़ एवं सन् 1962  भारत चीन युद्ध में एक लाख रुपए व सोने की मुठ की तलवार व अपने पुत्र ठा.ओमेंद्र सिंह को रक्षा कोष में दान दिया । लगातार  तीसरी पीढी आज भी देश सेवा कर रही है । ठा. अजीतसिंह के छोटे पुत्र ठा.नरेंद्रसिंह भारतीय सेना में बास्केटबॉल खिलाड़ी रहते हुए नेशनल गेम्स खेल चुके हैं तथा सेना में हेंडबॉल के कोच के पद पर कार्यरत हैं, इनके दो पुत्र है कुंवर परवेन्द्र सिंह व कुंवर राघवेन्द्र सिंह । रामबाग के कुओं में पानी की कमी के कारण बाग में पेड़-पौधे लुप्त होते गए । बाग में गणपत लाल माली ने वर्षों तक बागवानी की हैं । अब रामबाग पूर्ण रूप से अपना प्राचीन स्वरूप खो चुका है । दांता ग्राम की जैसे जैसे आबादी बढ़ती गई वैसे वैसे यह लोगों के लिए आवासीय परिसर बनने लगा । रामबाग में अब विशाल परिसर में क्षेत्र के सबसे बड़े निजी महाविद्यालय महर्षि परशुराम स्नात्तकोत्तर महाविद्यालय (एम.पी. कॉलेज) का निर्माण हुआ है जिसके निदेशक सुरेश शर्मा है जो सीकर जिला परिषद के सदस्य भी हैं । जिन्होंने दिन-रात मेहनत कर एक हिन्दी माध्यम के विद्यालय टैगोर पब्लिक शिक्षण संस्थान माध्यमिक विद्यालय व अंग्रेजी माध्यम के विद्यालय महर्षि परशुराम ग्लोबल एकेडमी एवं एम.पी. महाविद्यालय के विशाल भवन का निर्माण करवाया हैं । अब यहां दूरदराज गांवो के सैकड़ों छात्र छात्राएं पढ़ने के लिए आते है । वहीं बाग में महल के सामने उर्दू विषय के साथ संचालित होने वाला दांतारामगढ़ तहसील का सबसे बड़ा निजी विद्यालय अबुल कलाम आजाद शिक्षण संस्थान माध्यमिक विद्यालय हैं जिसकी स्थापना सन् 1999 में हुई थी। जिसके निदेशक किशनगढ़ रेनवाल निवासी मोहम्मद शब्बीर निर्माण हैं जिन्होंने अल्पसंख्यक समुदाय  के बालक-बालिकाओं को शिक्षा देकर एक कीर्तिमान स्थापित किया है। रामबाग की सीमा के पास दांता का सबसे पुराना निजी विद्यालय बाल विद्या मंदिर उच्च माध्यमिक विद्यालय और श्री शिरडी सांई बाबा आईटीआई कॉलेज है जिसके निदेशक डॉ. अनिल कुमार छीपा हैं। वहीं वर्धन शिक्षण संस्थान उच्च माध्यमिक विद्यालय हैं जिसके प्रधानाचार्य गंगाराम सैनी हैं। क्षेत्र में जलस्तर गिरने से पानी की कमी के कारण रामबाग तो नही रहा फिर भी कॉलेज व स्कूल होने के कारण जिले भर में रामबाग का नाम पूर्व की तरह ही हैं। जैसे आज स्कूल व कॉलेज का नाम है वैसे ही रामबाग का नाम इससे पहले भी यहां के राजपरिवार के वासिंदो ने देश विदेश में रोशन किया है उसको आज भी कायम रखा जा रहा है।

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