झुंझुनूं जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने सहकार जीवन सुरक्षा बीमा योजना में बड़ी लापरवाही सामने आने पर भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को कड़ी फटकार लगाई है।
आयोग ने कहा कि बीमा प्रीमियम लेने के बावजूद ग्रामीणों के नाम मास्टर पॉलिसी में शामिल नहीं करना गंभीर लापरवाही और अनुचित व्यापार व्यवहार को दर्शाता है।
यह फैसला आयोग के अध्यक्ष मनोज कुमार मील और सदस्य प्रमेन्द्र कुमार सैनी ने सजना देवी बनाम एलआईसी एवं अन्य मामले में सुनाया।
395 ग्रामीणों से प्रीमियम लिया, लेकिन पॉलिसी में नाम नहीं
प्रकरण के अनुसार चुड़ैला ग्राम सेवा सहकारी समिति के 395 सदस्यों से सहकार जीवन सुरक्षा योजना के तहत बीमा प्रीमियम वसूला गया था।
केंद्रीय सहकारी बैंक के माध्यम से 5 लाख 54 हजार 275 रुपए की राशि एलआईसी को भेजी गई और मास्टर पॉलिसी भी जारी हुई, लेकिन बीमित सदस्यों के नाम उसमें जोड़े ही नहीं गए।
पति की मौत के बाद सामने आया मामला
मामला तब सामने आया जब परिवादिया सजना देवी के पति श्योराम की 17 फरवरी 2013 को मृत्यु हो गई।
श्योराम ने ग्राम सेवा सहकारी समिति चुड़ैला के माध्यम से ऋण लिया था और बीमा प्रीमियम भी जमा करवाया था। लेकिन मृत्यु के बाद बीमा क्लेम के लिए वर्षों तक विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे।
पीड़िता को करीब 9 साल 4 महीने तक न्याय के लिए संघर्ष करना पड़ा।
आयोग ने एलआईसी की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
उपभोक्ता आयोग ने अपने आदेश में कहा कि ग्रामीण और सहकारी क्षेत्र के उपभोक्ताओं से समय पर प्रीमियम तो वसूला जाता है, लेकिन क्लेम के समय उन्हें अनावश्यक परेशानियों और लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
आयोग ने टिप्पणी की कि बीमा कंपनियों का उद्देश्य केवल मुनाफा कमाना नहीं होना चाहिए, बल्कि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना भी उनकी जिम्मेदारी है।
85 हजार की शास्ति और डेढ़ लाख की क्षतिपूर्ति
आयोग ने राष्ट्रीय लोक अदालत की पवित्र भावना का पालन नहीं करने पर 85 हजार रुपए की शास्ति लगाने के निर्देश दिए।
साथ ही पीड़िता को वर्षों तक मानसिक पीड़ा और न्याय के लिए संघर्ष करने के कारण डेढ़ लाख रुपए विशेष क्षतिपूर्ति दिलाना न्यायोचित बताया।
सरकार को भी भेजी गई आदेश की प्रति
उपभोक्ता आयोग ने इस फैसले की प्रति राज्य सरकार के मुख्य सचिव को भेजी है।
आयोग ने ग्राम सेवा सहकारी समितियों से जुड़ी योजनाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की जरूरत बताई।
अधिवक्ताओं से नि:शुल्क पैरवी की अपील
आयोग अध्यक्ष मनोज कुमार मील ने जिला अभिभाषक संस्था के अधिवक्ताओं से उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की भावना को मजबूत करने के लिए सहयोग की अपील की।
उन्होंने वर्ष में कम से कम एक मामले में नि:शुल्क पैरवी करने का भी आग्रह किया।





