क्या राजस्थान में कांग्रेस बिल्ली के भाग का छीका टूटने के इंतजार मे है ?

क्या भाजपा बातों के पुलाव को प्रदेश में परोशने की तैयारी कर चुकी है ?

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प्रदेश में जैसे-जैसे मतदान दिवस नजदीक आता जा रहा है वैसे वैसे राजनीतिक परिदृश्य में तेजी से घटनाक्रम घटित हो रहे हैं शायद राजनीतिक पंडितों ने भी नहीं सोचा होगा कि चुनावों से काफी समय पहले जो एग्जिट पोल जारी हुए थे उनके अंदर कांग्रेस में प्रचंड बहुमत के साथ वापसी की बात कही गई थी और सभी राजनीतिक लोग भी यही मान रहे थे कि कांग्रेस को सत्ता में वापसी करेगी लेकिन जैसे-जैसे प्रचार के क्षेत्र में कांग्रेस भाजपा से पिछड़ी है वैसे-वैसे स्थिति में परिवर्तन आता जा रहा है क्योंकि भाजपा के पास स्टार प्रचारकों की लम्बी लिस्ट है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पार्टी अध्यक्ष अमित शाह, राजनाथ सिंह, योगी आदित्यनाथ,वसुंधरा राजे, हेमा मालिनी इस तरह बहुत सारे लोग हैं जिनको जनता सुनना चाहती है। दूसरी तरफ कांग्रेस की बात करें तो कांग्रेस के पास स्टार प्रचारकों का अकाल है सिर्फ राहुल गांधी, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट के अलावा और कोई बड़ा स्टार प्रचारक नहीं है। इसमें भी बात यह महत्वपूर्ण है कि प्रदेश स्तर पर बात करें तो अशोक गहलोत कांग्रेस के सबसे मजबूत नेता के रूप में माने जाते हैं लेकिन जब से मुख्यमंत्री पद के ऊपर कांग्रेस ने भ्र्म फैलाया है उसका लाभ भी भाजपा को मिल रहा है। जिसके चलते वह भाजपा आरोप लगा रही है कि उनके पास ना तो नेता है ना नीति है ना नियत है। इन सभी चीजों को ध्यान में रखते हुए भाजपा प्रचार में अग्रेसिव नजर आ रही है क्योंकि जो उम्मीदवारों की सूची जारी करने में भाजपा ने बाजी मारी थी और उसमें कांग्रेस फिसड्डी साबित हुई। लेकिन जैसे-जैसे समय गुजरता जा रहा है वैसे-वैसे सट्टे बजार मे भी कांग्रेस के कुल सींटो के आकड़े में गिरती जा रही है। इसकी चर्चा कोंग्रेस के लोगो में भी सुनी जा रही है। भाजपा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पूरा लाभ मिलता प्रतीत हो रहा है। भाजपा अपने वोटरों के दिमाग में फीड करने के काम कर रही है कि आपका वोट नरेंद्र मोदी का हाथ मजबूत करेगा ऐसी स्थिति में जहा पर पार्टी के सिम्बल लेने वाले प्रत्याशी कमजोर पड़ रहे है वहां पर कमल के फूल को आगे रखकर वोट माँगा जा रहा है। भाजपा की इस निति के कारण युवा मतदाता अभी तक भाजपा के साथ बने हुए दिखाई पड़ते है। भाजपा और कांग्रेस दोनों की सोशल मीडिया पर बात करे तो उसमे भी भाजपा ही आगे दिखाई पड़ रही है। पूर्व मुख्यमंत्री भी यह बात कह चुके है कि भाजपा के लोगो को बात बनाना आता है। जिससे अपनी बात जनता में अच्छे से परोस रहे है। भाजपा की मार्केटिंग करने के लिए आर एस एस जैसे संगठन की मजबूत लॉबी है। वही कई स्थानों पर कांग्रेस प्रचार में भी पिछड़ रही है जिससे कांग्रेस के कुछ नेता तो बिल्ली के भाग का छीका टूटने के इन्तजार में बैठे है। क्योकि वो ये तय कर चुके है कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनाना निश्चित है। कही कांग्रेस का ओवर कॉन्फिडेंस उसे न ले डूबे। कई स्थानों पर इसका लाभ निर्दलीय व भाजपा के उम्मीदवार उठाने में तैयार दिखाई पड़ते है।

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