New Industrial Clusters : हरियाणा सरकार की तरफ से प्रदेश को औद्योगिक क्रांति लाने का प्लान बनाया है। अब अपनी पारंपरिक औद्योगिक पहचान को नई दिशा देने की तैयारी में है। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी पदमा योजना के तहत अंबाला जिले के सभी 6 ब्लॉकों को ‘वन ब्लॉक, वन प्रोडक्ट’ मॉडल में शामिल किया गया है।
इस योजना का उद्देश्य औद्योगिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों में लघु उद्योगों का मजबूत नेटवर्क तैयार कर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करना है। इस नए उद्योग के लिए जमीनों का अधिग्रहण किया जाएगा। जहां पर क्लटर रेट से कई गुना दामों पर जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। ऐसे में किसानों पर नोटों की बारिश होने वाली है।
सरकार ने प्रत्येक ब्लॉक की भौगोलिक स्थिति, स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक कार्यक्षमता के आधार पर अलग-अलग औद्योगिक क्लस्टर तय किए हैं। बता दें कि अम्बाला सिटी को किचन अप्लायंसेज, अम्बाला कैंट को साइंटिफिक उपकरण, साक्ष्य को इलेक्ट्रॉनिक सर्किट बोर्ड, नारायणगढ़ को एग प्रोडक्ट्स, बराड़ा को चावल आधारित उत्पाद और शहजादपुर को न्यूट्रास्यूटिकल्स सेक्टर के लिए चिह्नित किया गया है।
योजना के अनुसार प्रत्येक ब्लॉक में 15 से 100 एकड़ तक भूमि पर नए एमएसएमई क्लस्टर स्थापित किए जाएंगे, जहां कम से कम 20 सूक्ष्म और लघु इकाइयों की स्थापना अनिवार्य होगी। क्लस्टर विकसित करने वाली निजी एजेंसियों को 50 से 85 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता दी जाएगी, जबकि उद्योग लगाने वाले उद्यमियों को 30 प्रतिशत पूंजी निवेश सब्सिडी और टर्म लोन पर 6 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी का लाभ मिलेगा।
15 से 100 एकड़ तक में विकसित होंगे क्लस्टर
पदमा योजना के तहत 15 से 100 एकड़ तक के एमएसएमई क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। प्रत्येक ब्लॉक में न्यूनतम 25 एकड़ भूमि पर आधुनिक औद्योगिक ढांचा तैयार होगा। इसमें सड़क, बिजली, पानी, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट, पार्किंग, श्रमिक हॉस्टल और फायर फाइटिंग जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
इसके अलावा “प्लग एंड प्ले” औद्योगिक शेड, कॉमन फैसिलिटी सेंटर, बिजनेस डेवलपमेंट सेंटर, पैकेजिंग यूनिट, वेयरहाउस, कॉमन टेस्टिंग लैब और प्रदर्शनी केंद्र जैसी आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।
गांवों के उत्पाद अब पहुंचेंगे राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजार
पदमा योजना के तहत अब गांवों में बनने वाले उत्पादों को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की तैयारी है। सरकार छोटे उद्यमियों और ग्रामीण उद्योगों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ने पर विशेष जोर दे रही है। इसके लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उत्पादों की लिस्टिंग, ब्रांडिंग और प्रचार-प्रसार पर होने वाले खर्च की प्रतिपूर्ति भी सरकार करेगी।
वहीं, सीएलयू और एनओसी जैसी जरूरी मंजूरियों के लिए अब अलग-अलग विभागों के चक्कर भी नहीं लगाने पड़ेंगे। इसके लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया जाएगा, जहां एक ही जगह से सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी हो सकेंगी।
क्लस्टर में उद्योग लगाने वाले छोटे उद्यमों को मिलेगा अनुदान
पदमा कैपिटल इन्वेस्टमेंट सब्सिडी स्कीम के तहत क्लस्टर के भीतर उद्योग लगाने वाले माइक्रो और स्मॉल उद्यमों को भवन और प्लांट-मशीनरी पर निवेश के बदले अनुदान मिलेगा। महिला, एससी और स्वयं सहायता समूह आधारित इकाइयों को 30 प्रतिशत तक, अधिकतम 30 लाख की सब्सिडी दी जाएगी, जबकि अन्य इकाइयों को 25 प्रतिशत तक, अधिकतम 25 लाख का लाभ मिलेगा। क्लस्टर के बाहर संबंधित ब्लॉक में उद्योग लगाने वालों को इसी सहायता का आधा लाभ मिलेगा।
50 एकड़ से बड़े प्रोजेक्ट पर 45 करोड़ तक मिलेगी सहायता
पदमा क्लस्टर विकसित करने के लिए 50 से 85 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता देगी। 50 एकड़ तक के प्रोजेक्ट्स को अधिकतम 35 करोड़ और उससे बड़े प्रोजेक्ट्स को 45 करोड़ तक सहायता दी जाएगी। ‘बी’ श्रेणी ब्लॉकों में 50 प्रतिशत, ‘सी’ श्रेणी में 75 प्रतिशत और ‘डी’ श्रेणी ब्लॉकों में 85 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान रखा गया है। यह योजना 16 अगस्त 2028 तक प्रभावी रहेगी।
छोटे उद्योगों को आगे बढ़ाने के लिए विशेष सुविधाएं : मयूर
पदमा योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे उद्योगों को आगे बढ़ाने के लिए सरकार विशेष सुविधाएं दे रही है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर उत्पादों की ब्रांडिंग और लिस्टिंग से स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार मिलेगा।
योजना से युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। -मयूर मंचल, इंडस्ट्रियल एक्सटेंशन ऑफिसर, एमएसएमई।





