राजस्थान से वसुंधरा राजे के फाइनल पैकअप की तैयारी पूर्ण !

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सतीश पुनिया की ताजपोशी बनी संकेत

जयपुर, कल प्रदेश भाजपा को सतीश पूनिया के रूप में नया मुखिया मिल गया। मदन लाल सैनी के निधन के बाद खाली हुई प्रदेशाध्यक्ष की कुर्सी पर संगठन के शीर्ष नेताओं ने काफी मंथन कर प्रदेशसंगठन की कमान सतीश पूनिया को सौपी है। यह निर्णय अपने आप में वसुंधरा राजे के युग की समाप्ति का संकेत है आगामी स्थानीय निकाय चुनाव को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने प्रदेश की डोर एक जाट नेता को सौंपी है इसका फायदा वह ग्रामीण निकाय के चुनाव में लेने का प्रयास करेंगे। क्योंकि सत्ता में कांग्रेस है तो स्थानीय निकाय चुनाव में अपनी अस्मत को बचाने के लिए वह भरपूर प्रयास करेगी । इसके ध्यान में रखते हुए भाजपा ने जाट कार्ड खेला है ग्रामीण क्षेत्रों में जाट बहुलता होने के कारण को भी इससे जोड़कर देखा जा रहा है। इसके अलावा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन लाल सैनी जोकि ओबीसी से आते थे और जाट भी वर्तमान में ओबीसी में है तो यह भी एक समीकरण साधने का प्रयास किया गया है। हालांकि भाजपाका परम्परागत वोट बैंक रहा राजपूत समाज के अंदर इससे प्रतिक्रिया हो सकती है लेकिन आलाकमान ने मुख्यमंत्री पद के लिए अभी कार्ड बचा कर रखे हैं जिसके चलते वसुंधरा राजे के रिप्लेसमेंट पर सबसे अधिक संभावना कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को लाने की बनती है। जो कि हाल ही में केंद्र सरकार में मंत्री एवं जयपुर ग्रामीण से सांसद हैं। हालांकि चर्चाएं गजेंद्र सिंह शेखावत के नाम की भी चली लेकिन उनको केंद्र में महत्वपूर्ण भूमिका दे दी गई है तो शायद ही उनको राज्य स्तर पर वापस भेजा जाए। इन सभी तथ्यों से यह सिद्ध हो रहा है कि प्रदेश भाजपा में एक नए युग का आरंभ हो रहा है। प्रदेश संगठन की बागडोर तो नए चेहरे सतीश पूनिया को सौंपी दी गई है। वही राजपूत समाज में किसी प्रकार की प्रतिक्रिया ना हो इसके लिए मुख्यमंत्री के दावेदारों पर भाजपा ने पत्ते नहीं खोले हैं लेकिन इतना संकेत तो मिल गया है कि राजस्थान से वसुंधरा राजे की विदाई अब तय है।

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