Archive notice This article was published on 04 June 2026 and reflects conditions at the time of publication. Information, figures, and context may have changed since.

चिड़ावा,मनीष शर्मा शहर के खेतड़ी रोड स्थित पावर हाउस के पीछे एक राष्ट्रीय पक्षी मोर की करंट लगने से मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मोर 33 केवी विद्युत लाइन की चपेट में आ गया, जिससे उसकी मौके पर ही मृत्यु हो गई।

घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्र में शोक का माहौल बन गया और स्थानीय लोगों ने वन विभाग को जानकारी दी।

वन विभाग ने संभाली कार्रवाई

सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की।

वनरक्षक लक्ष्मी के नेतृत्व में टीम ने मृत मोर के शव को कब्जे में लेकर नियमानुसार प्रक्रिया पूरी की।

इसके बाद वन विभाग की देखरेख में राष्ट्रीय पक्षी का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कराया गया।

भूतनाथ मुक्तिधाम में किया गया अंतिम संस्कार

मृत मोर का अंतिम संस्कार खेतड़ी रोड स्थित भूतनाथ मुक्तिधाम में विधि-विधान के साथ किया गया।

इस दौरान उपस्थित लोगों ने राष्ट्रीय पक्षी को श्रद्धांजलि अर्पित कर सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई दी।

“वन्यजीवों की सुरक्षा और संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।” स्थानीय नागरिक

वन्यजीव संरक्षण पर फिर उठे सवाल

मोर की मौत के बाद स्थानीय लोगों ने वन्यजीव संरक्षण को लेकर चिंता जताई।

लोगों का कहना है कि खुले विद्युत तार और उच्च वोल्टेज बिजली लाइनें पक्षियों तथा अन्य वन्यजीवों के लिए लगातार खतरा बनी हुई हैं।

उन्होंने संबंधित विभागों से ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा उपाय बढ़ाने की मांग की है।

स्थानीय नागरिक रहे मौजूद

अंतिम संस्कार के दौरान कई सामाजिक और स्थानीय प्रतिनिधि मौजूद रहे।

इनमें प्रमुख रूप से:

सहित अनेक नागरिकों ने राष्ट्रीय पक्षी के प्रति सम्मान व्यक्त किया।

भविष्य में सुरक्षा उपायों की मांग

क्षेत्रवासियों ने सुझाव दिया कि जहां पक्षियों की आवाजाही अधिक रहती है, वहां बिजली लाइनों पर सुरक्षा उपकरण और पक्षी संरक्षण उपाय लगाए जाएं।

उनका मानना है कि इससे भविष्य में ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

राष्ट्रीय पक्षी मोर का महत्व

मोर भारत का राष्ट्रीय पक्षी है और वन्यजीव संरक्षण के दृष्टिकोण से विशेष महत्व रखता है। इसकी सुरक्षा और संरक्षण के लिए विभिन्न कानूनों के तहत विशेष प्रावधान किए गए हैं।

इस घटना ने एक बार फिर वन्यजीवों और बिजली ढांचे के बीच सुरक्षा संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता को उजागर किया है।