सीकर। राजस्थान के बहुचर्चित नेक्सा एवरग्रीन ठगी मामले में सीकर की एडीजे-2 कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए चार आरोपियों को बरी कर दिया है।

यह मामला 6.50 लाख रुपए की कथित ठगी से जुड़ा था। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पुलिस जांच और आरोपों के समर्थन में पेश किए गए साक्ष्यों का परीक्षण किया।

बरी किए गए आरोपियों में सुभाष बिजारणियां, रणवीर, ओपेन्द्र और नरेश काजला शामिल हैं।

हालांकि, अन्य मामलों में सुनवाई और फैसले बाकी होने के कारण इन आरोपियों को फिलहाल जेल से रिहाई नहीं मिलेगी।

2676 करोड़ की ठगी से जुड़ा है मामला

नेक्सा एवरग्रीन प्रकरण राजस्थान में बड़े निवेश ठगी मामलों में चर्चित रहा है। मामले में 2676 करोड़ रुपए की कथित ठगी के आरोप लगाए गए थे।

इस प्रकरण से जुड़े राजस्थान के अलग-अलग क्षेत्रों में 200 से अधिक मुकदमे दर्ज होने की बात सामने आई थी।

शेखावाटी क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में लोगों ने कंपनी में निवेश किया था।

6.50 लाख निवेश के बाद कंपनी बंद होने का आरोप

मामले की शिकायत फदनपुरा निवासी रामकृष्ण ने सीकर के उद्योग नगर थाने में दर्ज कराई थी।

शिकायत के अनुसार, रामकृष्ण को कंपनी से जुड़े लोगों ने निवेश के लिए प्रेरित किया था। उन्हें कथित तौर पर बताया गया कि 50 हजार रुपए निवेश करने पर 14 महीने में 80 हजार रुपए वापस मिलेंगे।

इसके बाद रामकृष्ण ने अलग-अलग किस्तों में करीब 6.50 लाख रुपए निवेश किए।

आरोप है कि बाद में कंपनी बंद हो गई और निवेश की राशि वापस नहीं मिली।

कंपनी पर कार्रवाई और मुकदमे से रोकने का आरोप

शिकायत के मुताबिक रामकृष्ण ने कंपनी से जुड़े नरेश काजला से संपर्क किया।

आरोप है कि उन्हें बताया गया कि कंपनी पर ईडी की कार्रवाई हुई है और मुकदमा दर्ज कराने पर पैसे मिलने में परेशानी होगी।

बाद में जब रकम वापस नहीं मिली तो शिकायतकर्ता ने पुलिस का रुख किया।

कोर्ट ने साक्ष्यों को माना अपर्याप्त

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस की जांच और चार्जशीट में शामिल तथ्यों का परीक्षण किया।

कोर्ट के अनुसार, पुलिस ने शुरुआत में उच्च अधिकारियों के निर्देश और पुराने मामलों के आधार पर गंभीर धाराएं लगाई थीं।

इनमें बड्स एक्ट, इनामी चिट फंड और धन परिचालन योजना से संबंधित धाराएं भी शामिल थीं।

हालांकि, अदालत ने पाया कि आरोपियों के खिलाफ आरोप साबित करने के लिए ठोस और भरोसेमंद आपराधिक साक्ष्य पर्याप्त रूप से सामने नहीं आए।

चार्जशीट की जांच पर भी कोर्ट की टिप्पणी

अदालत ने यह भी देखा कि चार्जशीट दाखिल करने वाले अधिकारी ने जांच के दौरान सामने आए तथ्यों का पर्याप्त इस्तेमाल नहीं किया।

मामले में एक गवाह ने अदालत में यह भी कहा कि उसने चार्जशीट तैयार नहीं की थी।

अदालत ने माना कि गंभीर धाराएं लगाए जाने मात्र से आरोप साबित नहीं होते, बल्कि उनके समर्थन में विश्वसनीय साक्ष्य आवश्यक हैं।

इसी आधार पर कोर्ट ने इस मामले में चारों आरोपियों को बरी कर दिया।

पुलिसकर्मियों और पूर्व सैनिकों तक पहुंचा था निवेश का नेटवर्क

नेक्सा एवरग्रीन कंपनी के निवेश नेटवर्क का विस्तार सीकर और शेखावाटी सहित कई क्षेत्रों तक बताया गया था।

कंपनी से जुड़े लोगों ने कथित तौर पर अलग-अलग वर्गों के लोगों को निवेश के लिए लक्षित किया।

मामले में यह भी सामने आया कि कंपनी के एमडी रणवीर बिजारणियां की पत्नी लक्ष्मी सीकर एसपी कार्यालय में कांस्टेबल थीं और उन्होंने पुलिसकर्मियों के बीच कंपनी में निवेश का भरोसा बनाया।

इसी तरह कंपनी के एमडी सुभाष बिजारणियां के सेना से सेवानिवृत्त होने के कारण पूर्व सैनिकों को भी निवेश के लिए संपर्क किए जाने की बात सामने आई थी।

शेखावाटी में खोले गए थे कई कार्यालय

कंपनी से जुड़े कार्यालय राजस्थान के अलावा गुजरात, मध्य प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा में भी होने की जानकारी सामने आई थी।

राजस्थान में जयपुर, सीकर, चूरू, झुंझुनूं, जोधपुर और अजमेर सहित कई स्थानों पर कार्यालय खोले गए थे।

बताया गया कि कंपनी का नेटवर्क शेखावाटी क्षेत्र में विशेष रूप से व्यापक था।

कई एजेंटों द्वारा अपने स्तर पर कार्यालय खोलकर निवेशकों से रकम जमा करवाने के आरोप भी सामने आए थे।

जब निवेशकों के खाते में नहीं पहुंची रकम

मामले के अनुसार, निर्धारित समय पर निवेशकों के खातों में रकम नहीं पहुंची तो लोगों की चिंता बढ़ने लगी।

कंपनी की ओर से जल्द भुगतान का भरोसा दिलाया गया, लेकिन बाद में भी रकम नहीं मिलने पर निवेशकों ने कंपनी से जुड़े कार्यालयों और थानों का रुख करना शुरू कर दिया।

कई निवेशक कथित प्रोजेक्ट कार्यालयों तक भी पहुंचे, जहां उन्हें भुगतान का आश्वासन मिलने की बात सामने आई।

अन्य मामलों में फैसला आना बाकी

सीकर कोर्ट के इस फैसले से एक मामले में चार आरोपियों को राहत मिली है, लेकिन इसका असर नेक्सा एवरग्रीन से जुड़े अन्य मामलों पर स्वतः नहीं पड़ेगा।

सुभाष बिजारणियां, रणवीर, ओपेन्द्र और नरेश काजला के खिलाफ अन्य प्रकरण भी लंबित बताए गए हैं।

इसलिए अन्य मामलों में अदालत के फैसले आने तक चारों आरोपियों की कानूनी स्थिति अलग-अलग प्रकरणों के आधार पर तय होगी।

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