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प्राकृतिक खेती को बढ़ावा
जानकारी के लिए बता दे कि सरकार के इस कदम का मकसद पारंपरिक और प्राकृतिक खेती के तरीकों को बढ़ावा देना, मवेशियों के बचाव में मदद करना और कमजोर किसान को आर्थिक मदद मिलेगी जिससे उसके जीवन को आत्मनिर्भर बनाने में यह योजना अहम किरदार निभाएगी. अधिकारियों ने बताया कि आधुनिक खेती की मशीनरी के तेजी से बढ़ने के साथ, पिछले कुछ सालों में खेती में बैलों का इस्तेमाल तेजी से कम हुआ है.इस बदलाव ने न सिर्फ देसी मवेशियों की नस्लों की मांग कम की है, बल्कि उनके लंबे समय तक बचाव पर भी बुरा असर डाला है.
किन किसानों को मिलेगा इस योजना का लाभ
अधिक जानकारी के लिए बता दे कि कृषि विभाग अभी उन किसानों का एक डेटाबेस तैयार कर रहा है, जो खेती के लिए बैलों का इस्तेमाल करते हैं, जिसके आधार पर पात्र लाभार्थी को शॉर्टलिस्ट किया जाएगा. विभाग यह पक्का करने के लिए फील्ड वेरिफिकेशन भी कर रहा है कि सिर्फ बैलों से खेती करने वाले असली लोगों को ही मदद मिले.
किसान डिजिटल प्लेटफार्म कि ले मदद
अधिक जानकारी के लिए बता दे कि इस पहल का एक खास हिस्सा राज किसान साथी पोर्टल है, जो खेती की स्कीमों और किसान सेवाओं के लिए राज्य सरकार का डेडिकेटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म है. यहाँ किसान भाई उस हर योजना के बारे में जानकारी ले सकते है जो उन्हें सरकार द्वारा दी जाती है और लाभ पहुँचाने का काम करती है।
