Archive Notice: This article was originally published on 13 अप्रैल 2026.
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Rajasthan Mustard Oil Prices Hike: सरसों की कीमतें भले ही किसानों के भाग्य को रोशन कर रही हों, लेकिन बढ़ती कीमतों ने खाना पकाने के तेल ने लोगों को झटका दिया है।

सरसों का बम्फर उत्पादन

बता दे की सरसों के तेल की कीमतें नियंत्रण में नहीं आ रही हैं। ऐसे में अब आमजन को भारी नुकशान का सामना करना पद रहा है।

हालांकि सवाईमाधोपुर सहित राज्य के कई जिलों में सरसों का बंपर उत्पादन हुआ है, लेकिन सरसों के तेल की कीमत अभी भी आसमान छू रही है। ऐसे में इन दिनों आम आदमी की जेब ढीली पड़ रही है।

अधिक जानकारी के लिए बता दे की खाद्य तेलों, पेट्रोलियम उत्पादों और एलपीजी गैस की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अब मध्य-पूर्व एशिया में युद्ध का असर भारतीय बाजार में खाद्य तेलों पर पड़ने लगा है।

लगभग 20 दिनों में सरसों के तेल में लगभग 20 रुपये की वृद्धि हुई है।

बाजार में अब यह 160-170 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। इसके प्रमुख मध्य खाड़ी देशों में से एक में युद्ध के कारण खाद्य तेलों का आयात प्रभावित हुआ है।

दरों पर एक नजर…

तेल – दाम (प्रति लीटर)
सरसों- 160 से 170
रिफाइंड- 160
मूंगफली- 200

बाजार में सरसों की आवक भी पिछले एक सप्ताह से प्रभावित हो रही है। बाजार में अब सामान कम पहुंच रहा है। इसी तरह सोयाबीन तेल की कीमत में भी बढ़ोतरी हुई है।

कीमतों में वृद्धि ने आम आदमी के रसोई के बजट को परेशान कर दिया है। बढ़ती कीमतों के बीच लोगों ने अब सरसों का तेल खरीदना बंद कर दिया है।

आम तौर पर, जब नई फसल आती है, तो उत्तर भारत में लोग साल भर सरसों का तेल खरीदते हैं। लेकिन इस बार कीमत कम होने की उम्मीद है। कीमतें कम नहीं हुईं बल्कि तेजी से बढ़ीं, जिससे लोग अब निराश हैं।

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