Archive Notice: This article was originally published on 8 अप्रैल 2019.
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शेखावाटी के तीनों जिले सीकर, चूरू, झुंझुनू शुष्क क्षेत्र में आते हैं यहां के लोगों का मुख्य कार्य कृषि और पशुपालन है। कृषि और पशुपालन दोनों एक दूसरे के पूरक हैं लेकिन पानी की कमी के कारण पशुओं के लिए वर्षभर हरे चारे की समस्या पशुपालको के लिए बनी रहती है। जिसके चलते पशुओं के शारीरिक विकास अधिक दूध उत्पादन एवं उत्तम स्वास्थ्य में भी गिरावट देखी जाती है। पशुपालकों को हरे चारे की कमी पूर्ति के लिए बाजार से महंगा पशु आहार ही एक मात्र विकल्प बचता है, लेकिन जैसे-जैसे कृषि क्षेत्र के अंदर नवाचार आते जा रहे हैं उनमें से ही एक है अजोला फर्न। पशुओं के लिए इसे हरे चारे के रूप में वरदान माना गया है। महंगे एवं व्यवसायिक दाना मिश्रण का यह सस्ता और बेहतर विकल्प है। इसके उत्पादन की विधि बहुत ही सरल है और इसमें किसी प्रकार की लागत भी नहीं आती है। इसके लिए आप अपने कृषि पर्यवेक्षक या कृषि विज्ञान केंद्र में जाकर विस्तार से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र झुंझुनू के वैज्ञानिक डॉ रशीद खान ने जानकारी देते हुए बताया कि यह पशु आहार में हरे चारे की कमी की पूर्ति को करता है, इसमें 20 से 25{44d7e8a5cbfd7fbf50b2f42071b88e8c5c0364c8b0c9ec50d635256cec1b7b56} प्रोटीन और मिनरल पाए जाते हैं इससे दूध की मात्रा में वृद्धि होती है साथ में गुणवत्ता में भी वृद्धि होती है। एक से डेढ़ किलो अजोला फर्न आप साफ पानी से धोकर पशुओं के आहार में मिला कर देते हैं। बाजार से लाकर दिए जाने वाले कैल्शियम वगैरह या अन्य सबस्टीटूट देने की आवश्यकता नहीं होती है।

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