Archive Notice: This article was originally published on 18 जुलाई 2022.
Information, figures, and context may have changed since the time of publication.

झुंझुनूं, लायन्स क्लब झुंझुनूं द्वारा शहीद हवलदार मेजर पीरू सिंह की 74 वीं पुण्यतिथि पर अश्रुपूरित श्रद्धांजलि कार्यक्रम पीरु सिंह सर्किल स्थित पीरुसिंह स्मारक पर आयोजित किया गया। जानकारी देते हुए लायन्स क्लब झुंझुनूं के अध्यक्ष लॉयन अमरनाथ जांगिड़, सचिव लॉयन शिवकुमार जांगिड़ एवं कोषाध्यक्ष भागीरथ प्रसाद जांगिड़ ने बताया कि कार्यक्रम में जिला कलेक्टर लक्ष्मण सिंह कुडी, जिला पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा, अतिरिक्त जिला कलेक्टर गौड़, एवं जिला सैनिक कल्याण बोर्ड के अधिकारियों सहित अतिथिगण की गरिमामय उपस्थिति में आयोजित कार्यक्रम में भूतपूर्व सैनिकों, कार्यक्रम प्रायोजक एवं संयोजक डा.उम्मेद सिंह शेखावत सहित क्लब पदाधिकारियों एवं सदस्यों सहित अन्य गणमान्य जन ने एक मिनट का मौन रखकर शहीद हवलदार मेजर पीरू सिंह की ताम्र प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर अश्रुपूरित श्रद्धांजलि दी। क्लब पीआरओ डॉ.डी.एन.तुलस्यान ने बताया कि पीरुसिंह स्मारक पर साफ सफाई सहित मरम्मत आदि का कार्य करवाया गया है। उन्होंने बताया कि सम्मानित सैनिकों के नाम की टूटी हुई पट्टिका को एवं खंडित अन्य टाईलों को पहले ही ठीक करवाया जा चुका था। विदित है कि लायन्स क्लब द्वारा विगत 26 वर्षों से मेजर पीरू सिंह की 18 जुलाई पुण्यतिथि पर अश्रुपूरित श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन लगातार किया जाता रहा है। इस अवसर पर पूर्व विधायक डॉ.मूल सिंह शेखावत, हनुमान सिंह शेखावत, बजरगं सिंह, करणी सिंह, पृथ्वी सिंह, अध्यक्ष लॉयन अमरनाथ जांगिड़, सचिव लॉयन शिवकुमार जांगिड़ एवं कोषाध्यक्ष भागीरथ प्रसाद जांगिड़, कार्यक्रम प्रायोजक एवं संयोजक डॉ.उम्मेद सिंह शेखावत, नरेन्द्र व्यास, परमेश्वर हलवाई, डॉ.मनोज सिंह टीकेएन, अशोक सोनी, डॉ.एन.एस.नरुका, कैलाशचन्द्र सिंघानिया, श्रीमती विनिता शर्मा, महिपाल सिंह, रामप्रताप कुमावत, राधा कृष्ण गुप्ता, सुभाष प्रजापत, विरेन्द्र सिंह, डॉ.डी.एन.तुलस्यान, कैलाशचन्द्र टेलर, किशनलाल जांगिड़, डॉ.देवेन्द्र सिंह शेखावत, जवाहर सिंह, डॉ.मुकेश एस मुण्ड, नागरमल जांगिड़ सहित बडी संख्या में क्लब पदाधिकारी एंव क्लब सदस्य उपस्थित थे।

कार्यक्रम प्रायोजक एवं संयोजक डॉ.उम्मेद सिंह शेखावत ने बताया कि अपनी प्रचंड वीरता, कर्तव्य के प्रति निष्ठा और प्रेरणादायी कार्य के लिए कंपनी हवलदार मेजर पीरू सिंह भारत के युद्ध काल के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र से मरणोपरांत सम्मानित किए गए जो कि हमारे लिए गौरव की बात है। अपनी विलक्षण वीरता के बदले शहीद हवलदार मेजर पीरू सिंह ने अपने अन्य साथियों के समक्ष अपनी एकाकी वीरता, दृढ़ता व मजबूती का अप्रतिम उदाहरण प्रस्तुत किया जो कि काबिले तारीफ है। राजस्थान में झुंझुनू जिले के बेरी नामक छोटे से गांव में 20 मई 1918 में ठाकुर लाल सिंह के घर जन्मे पीरू सिंह चार भाइयों में सबसे छोटे थे तथा राजपूताना राइफल्स की छठी बटालियन की डी कंपनी में हवलदार मेजर थे। मई 1948 में छठी राजपूत बटालियन ने उरी और टिथवाल क्षेत्र में झेलम नदी के दक्षिण में पीरखण्डी और लेडी गली जैसी प्रमुख पहाडिय़ों पर कब्जा करने में विशेष योगदान दिया। इन सभी कार्यवाहियों के दौरान पीरू सिंह ने अद्भुत नेतृत्व और साहस का परिचय दिया। जुलाई 1948 के दूसरे सप्ताह में जब दुश्मन का दबाव टिथवाल क्षेत्र में बढऩे लगा तो छठी बटालियन को उरी क्षेत्र से टिथवाल क्षेत्र में भेजा गया। टिथवाल क्षेत्र की सुरक्षा का मुख्य केन्द्र दक्षिण में 9 किलोमीटर पर रिछमार गली था जहां की सुरक्षा को निरंतर खतरा बढ़ता जा रहा था। अत: टिथवाल पहुंचते ही राजपूताना राइफल्स को दारा पहाड़ी पहाड़ी की बन्नेवाल दारारिज पर से दुश्मन को हटाने का आदेश दिया गया था। यह स्थान पूर्णत: सुरक्षित था और ऊंची-ऊंची चट्टानों के कारण यहां तक पहुंचना कठिन था। जगह तंग होने से काफी कम संख्या में जवानों को यह कार्य सौंपा गया। 18 जुलाई को छठी राइफल्स ने सुबह हमला किया जिसका नेतृत्व हवलदार मेजर पीरू सिंह कर रहे थे। पीरू सिंह की प्लाटून जैसे-जैसे आगे बढ़ती गई, उस पर दुश्मन की दोनों तरफ से लगातार गोलियां बरस रही थीं। अपनी प्लाटून के आधे से अधिक साथियों के मारे जाने पर भी पीरू सिंह ने हिम्मत नहीं हारी। वे लगातार अपने साथियों को आगे बढऩे के लिए प्रोत्साहित करते रहे एवं स्वयं अपने प्राणों की परवाह न कर आगे बढ़ते रहे तथा अन्त में उस स्थान पर पहुंच गये जहां मशीन गन से गोले बरसाये जा रहे थे। उन्होंने अपनी स्टेनगन से दुश्मन के सभी सैनिकों को भून दिया जिससे दुश्मन के गोले बरसने बन्द हो गये। जब पीरू सिंह को यह एहसास हुआ कि उनके सभी साथी मारे गये तो वे अकेले ही आगे बढ़ चले। रक्त से लहूलुहान पीरू सिंह अपने हथगोलों से दुश्मन का सफाया कर रहे थे। इतने में दुश्मन की एक गोली आकर उनके माथे पर लगी और गिरते-गिरते भी उन्होंने दुश्मन की दो खंदक नष्ट कर दीं। अपनी जान पर खेलकर पीरू सिंह ने जिस अपूर्व वीरता एवं कर्तव्य परायणता का परिचय दिया वह भारतीय सेना के इतिहास का एक महत्त्वपूर्ण अध्याय है। देश हित में पीरू सिंह ने अपनी विलक्षण वीरता का प्रदर्शन करते हुए अपने अन्य साथियों के समक्ष अपनी वीरता, दृढ़ता व मजबूती का उदाहरण प्रस्तुत किया। इस कारनामे को विश्व के अब तक के सबसे साहसिक कारनामों में से एक माना जाता है। तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू ने उस समय उनकी माता जडाव कंवर को लिखे पत्र में लिखा था कि देश कम्पनी हवलदार मेजर पीरू सिंह का मातृभूमि की सेवा में किए गए उनके बलिदान के प्रति कृतज्ञ है।

The most trusted source for latest news, breaking news and detailed analysis of Jhunjhunu, Sikar and Churu district. We bring news directly to you from Jhunjhunu, Nawalgarh, Mandawa, Chirawa, Udaipurwati,...