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ईरान में चल रहे संघर्ष के कारण विश्व भर में यूरिया और अन्य उर्वरकों का संकट बना हुआ है। ऐसे में भारत के पड़ौसी देश नेपाल ने भारत से करीब 80 हजार टन यूरिया खरीदने का फैसला लिया है। यूरिया की यह खेप नेपाल की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ पूरी खाद्य व्यवस्था के लिए जरूरी है। चूंकि नेपाल मुख्य रूप से चावल की खेती करता है और यहां चावल की खपत बहुत अधिक होती है।
नेपाल की बालेन शाह सरकार की कैबिनेट ने भारत से यूरिया खरीद को मंजूरी तो दे दी है, लेकिन यह डील सीधे सरकार से सरकार होने वाली है। ऐसे में नेपाल सरकार द्वारा इसके लिए भारत में सरकारी स्वामित्व वाली राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर लिमिटेड कंपनी से खरीद के लिए कीमत बताने को कहा है। इसी सप्ताह उम्मीद है कि भारत की ओर से नेपाल को यूरिया सप्लाई के लिए रेट दे दिए जाएं।
भारत भी करता है यूरिया का आयात
भारत भी अपनी खपत के यूरिया का बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से आयात करता है। ऐसे में खाडी संकट के कारण भारत भी परेशानी में है। इसके बावजूद पुराने समझौतों के तहत भारत नेपाल के साथ यह डील कर सकता है। हालांकि इसको लेकर नेपाली कृषि मंत्रालय के संयुक्त सचिव राम कृष्ण श्रेष्ठ भी कह चुके हैं कि नेपाल को इसी सप्ताह भारत से कीमतों की सूची मिल सकती है।
इसके बाद कीमतों की समीक्षा होगी और फिर यूरिया मंगवाने पर फैसला होगा। हालांकि नेपाल को आश्वासन मिला है कि भुगतान के 120 दिनों में भारत डिलीवरी दे देगा। हालांकि नेपाल ने निवेदन किया है कि डिलीवरी का समय कुछ कम किया जाए।
पहले अधिक उर्वरकों की थी मांग
हालांक इससे पहले नेपाल सरकार द्वारा करीब 150,000 टन उर्वरक खरीदने की बात कर रहा था, लेकिन बजट के कारण अब 80 हजार टन ही यूरिया खरीदा जा रहा है। गौरतलब है कि भारत और नेपाल के बीच वर्ष 2022 में हुए समझौते के तहत इस खरीद में 60,000 टन यूरिया और 20,000 डीएसपी का सौदा हो रहा है। वहीं नेपाल में कृषि क्षेत्र के लोगों का कहना है कि धान के सीजन में करीब 250,000 टन खाद खाद की जरूरत होती है। ऐसे में नेपाल में इस बार धान की खेती प्रभावित हो सकती है।
