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इन्होंने पुराने मारवाड़ी भजन को नए अंदाज में पेश किया जो लोगों को खूब पसंद आए ओर इनकी लोकप्रियता बनने लगीं थीं । बहुत कम उम्र में अपने हुनूर ओर प्यारी आवाज से गायकी के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई हैं इनके इस पहचान का श्रेय यह अपने पिता व भाई राजू को देती हैं क्योंकि उनकी वजह से आज इसने इस मुकाम को हासिल किया हैं ओर लगातार ऊंचाईयां छू रही हैं।सुनीता स्वामी ने दो साल पहले लाईव प्रोग्राम करना शुरू किया था यह राजस्थान के अलावा अब बड़े शहरों में इनके कार्यकर्म आयोजित होते हैं इनके भजन सुनने के लिए लाखों में लोग एकत्रित होते हैं ओर पूरी रात बैठकर इनके भजन सुनते हैं। सुनीता स्वामी के प्रसिद्ध भजन,पहले जैसा प्रेम हमेशा कोनी रेवे रे , स्वर्गा से आयो है संदेश ,समय को भरोसो कोनी कद पलटी मार जावे, राम सुमरले सुखरत करले आगे आडो आवेलो,मत ले रे जीवडा नींद हरामी,काई कारण आयो बंदा ,भाई रे मत दिजो मावड़ली ने दोष कर्मा री रेखा न्यारी,लिख दो म्हारे रोम रोम में,कंचन वाली काया,काया नगर रे बीच में लहरियों आदि भजन है।
