Archive Notice: This article was originally published on 9 मई 2019.
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जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से चलाए जा रहे बाल विवाह रोकथाम अभियान के दौरान मिली धमेरी गांव में दो नाबालिग लड़कियों के बाल विवाह की सूचना पर प्रशासन ने अभिभावकों को बाल विवाह नहीं करने के लिए पाबंद किया है। प्राधिकरण सचिव राजेश कुमार दड़िया ने बताया कि राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष अय्यूब खान के मार्गदर्शन में एक अप्रैल से विशेष बाल विवाह रोकथाम अभियान चलाया जा रहा है, जो 30 जून तक जारी रहेगा। इस दौरान प्राधिकरण को सूचना प्राप्त हुई कि ग्राम धमेरी तहसील तारानगर में दो नाबालिग लड़कियों की शादी पीपल पूर्णिमा के अवसर पर होना तय किया गया है, जिस पर प्राधिकरण द्वारा प्रशासन, पुलिस प्रशासन एवं कंट्रोल रूम को सूचना दी गई। प्रशासनिक अधिकारियों ने कार्यवाही करते हुये ग्राम धमेरी जाकर नाबालिग लड़कियों के माता-पिता से समझाईश कर उन्हें बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में समझाया और बाल विवाह नहीं करने के लिए पाबन्द किया।

उन्होंने बताया कि प्राधिकरण द्वारा विशेष बाल विवाह अभियान के दौरान विद्यालयों, सार्वजनिक स्थानों पर बाल विवाह के संबंध में विधिक साक्षरता शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। बाल विवाह की सूचना प्राप्त होते ही तत्काल बाल विवाह को रुकवाने हेतु कड़े से कड़े कदम उठाए जाते हैं। प्राधिकरण द्वारा इस अभियान के माध्यम से चूरू जिले को बाल विवाह से मुक्त किये जाने हेतु भरसक प्रयास किये जा रहे हैं। विशेष बाल विवाह अभियान के दौरान बाल विवाहों की रोकथाम हेतु सरकारी मशीनरी एवं गैर सरकारी संस्थाओं क्रमशः प्रशासन, शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस प्रशासन, एन.जी.ओ. गैर सरकारी संस्था एवं पैरा लीगल वॉलिन्टियर्स आदि को भी बाल विवाहों के ठहराव की सूचना इस प्राधिकरण को तत्काल दिये जाने हेतु प्रोत्साहित किया हुआ है जिससे बाल विवाह जैसी कुरीति एवं इस अपराध का समाज से उन्मूलन हो सके।

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