Archive Notice: This article was originally published on 9 अगस्त 2022.
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झुंझुनू, राष्ट्रीय साहित्यिक व सामाजिक संस्थान आदर्श समाज समिति इंडिया के तत्वाधान में आजादी के महासंग्राम भारत छोड़ो आंदोलन की वर्षगांठ पर अगस्त क्रांति दिवस के उपलक्ष में क्रांतिवीरों, शहीदों व स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान में धर्मपाल गाँधी की अध्यक्षता में राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। ऑनलाइन राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में देश के विभिन्न प्रांतों से कवि, लेखक व साहित्यकारों ने भाग लेकर आजादी की राह में प्राणों की आहुति देने वाले महान क्रांतिवीरों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए देशभक्ति के तराने सुनाये। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर कवयित्री कमल धमीजा द्वारा सरस्वती वंदना से किया। कार्यक्रम का शानदार व सफल संचालन प्रयागराज से कवयित्री रेनू मिश्रा ‘दीपशिखा’ ने किया। कार्यक्रम की रूपरेखा बनाने व राष्ट्रीय कवि सम्मेलन को सफल बनाने में कार्यक्रम की प्रभारी कवयित्री कमल धमीजा का विशेष योगदान रहा। सम्मेलन को सफल बनाने में कार्यक्रम की सह प्रभारी एडवोकेट अनुजा मिश्रा लखनऊ व सहयोगी एडवोकेट मुजाहिद चौधरी हसनपुर अमरोहा का योगदान भी सराहनीय रहा। राष्ट्रीय कवि सम्मेलन के मुख्य अतिथि अंतर्राष्ट्रीय मानवतावादी लेखक संगठन (अमालेस) के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय प्रवीण तिवारी ‘रवि आभा’ व विशिष्ट अतिथि शिमला हिमाचल प्रदेश से बहुभाषाविद् साहित्यकार डॉ. प्रतिभा पॉल और छायावादी युग की प्रख्यात कवयित्री महादेवी वर्मा की शिष्या कविता उपाध्याय ने देशभक्ति कविता सुनाकर सभी को भाव विभोर किया। आदर्श समाज समिति इंडिया के अध्यक्ष धर्मपाल गांधी और विशिष्ट अतिथि डॉ. प्रतिभा पॉल ने कहा- आजादी का उत्सव मनाने से पहले अगस्त क्रांति दिवस मनाना जरूरी है। असंख्य सपूतों का बलिदान, भयावह यातना और दशकों के संघर्ष का नतीजा था कि हिन्दुस्तान को आजादी मिल गई। आज हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं। लेकिन इस आजादी को हासिल करने की कहानी इतनी भी आसान नहीं है। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान विश्वविख्यात काकोरी कांड के ठीक 17 साल बाद कांग्रेस के बम्बई अधिवेशन में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने 8 अगस्त 1942 को करो या मरो का नारा देकर आजादी के महासंग्राम भारत छोड़ो आंदोलन का आगाज किया। बम्बई अधिवेशन में सबसे पहला भाषण कांग्रेस के अध्यक्ष मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ने दिया, इसके बाद पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कांग्रेस की कार्यसमिति के प्रस्ताव को पढ़ा। इसके बाद सरदार पटेल ने भाषण दिया और नेहरू के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी। चौथे वक्ता के रूप में महात्मा गांधी ने भारत छोड़ो आंदोलन की घोषणा करते हुए ऐतिहासिक भाषण दिया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने इस बैठक में कुल तीन भाषण दिए थे। इनमें से एक भाषण अंग्रेज़ी में था, जिसमें उन्होंने ‘क्विट इंडिया’ का ऐतिहासिक नारा दिया। ‘क्विट इंडिया’ नारे का कई भाषाओं में अनुवाद किया गया और इसे हिंदी में ‘भारत छोड़ो’ कहा गया। मराठी में इसे ‘चले जाओ’ कहा गया। महात्मा गांधी को आंदोलन का नाम “भारत छोड़ो” स्वतंत्रता सेनानी युसूफ मेहर अली द्वारा सुझाया गया। देश की स्वतंत्रता में भारत छोड़ो आंदोलन का विशेष महत्व है। इस आंदोलन में सभी जाति व धर्म के लोगों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया था। भारत छोड़ो आंदोलन में महिलाओं का भी अविस्मरणीय योगदान रहा है। यह आंदोलन आजादी की अंतिम व निर्णायक लड़ाई थी। भारत छोड़ो आंदोलन का आगाज होते ही कांग्रेस के तमाम बड़े नेताओं को जेल में डाल दिया गया। तब 9 अगस्त 1942 को बम्बई के गोवालिया टैंक मैदान में अरुणा आसफ अली ने झंडा फहराया। अब इस ऐतिहासिक मैदान का नाम अगस्त क्रांति मैदान है और 9 अगस्त को अगस्त क्रांति दिवस के रूप में मनाया जाता है। आदर्श समाज समिति इंडिया पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष एडवोकेट मुजाहिद चौधरी, उत्तरी पश्चिमी दिल्ली की अध्यक्ष चंद्रमणि ‘मणिका’ ने कहा- स्वतंत्रता आंदोलन भारतीय इतिहास का वह युग है, जो पीड़ा, कड़वाहट, दंभ, आत्मसम्मान, गर्व, गौरव तथा सबसे अधिक शहीदों के लहू को समेटे है। स्वतंत्रता के इस महायज्ञ में समाज के प्रत्येक वर्ग ने अपने-अपने तरीके से बलिदान दिये। स्वाधीनता आन्दोलन में कवि, लेखक, शायर और साहित्यकारों ने भी अपना भरपूर योगदान दिया। अंग्रेजों को भगाने में कलमकारों ने अपनी भूमिका बखूबी निभाई। क्रांतिकारियों से लेकर देश के आम लोगों तक के अंदर लेखकों ने अपने शब्दों से जोश भरा। स्वतंत्र होना हर इंसान का बुनियादी हक है। इस हक की लड़ाई में भारत के कई वीर सपूतों ने अपने प्राणों की आहुति दी है, तब जाकर हम आजाद भारत में सांस ले रहे हैं। आज के हमारे कवियों और साहित्यकारों का यह महती दायित्व बनता है कि वे इस देश के बारे में सोचें और उसी परंपरा को जीवित रखें।
ऑनलाइन राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में राजस्थान अजमेर से सुनीता जैन, हरियाणा फरीदाबाद से सीमा कौशिक ‘मुक्त’ व कमल धमीजा। रायबरेली से कवयित्री पुष्पलता ‘लक्ष्मी’। प्रयागराज से रेनू मिश्रा ‘दीपशिखा’, डॉ. उपासना पाण्डेय, महक जौनपुरी व कविता उपाध्याय। देहरादून से डॉ. राकेश कपूर, लखनऊ से अल्का अस्थाना व कवयित्री अनुजा मिश्रा। नैनीताल से बीना फुलेरा व अमृता पाण्डेय। झुंझुनूं राजस्थान से भागमती कांटीवाल व अशोक जोरासिया। अस्थाना महेश प्रकाश बरेलवी लखनऊ, एटा उत्तर प्रदेश से राकेश शम्स, कुरुक्षेत्र हरियाणा से सूरजपाल सिंह, अलीगढ़ से ललित सिंह ललित व अभय सिंह अभय। दिल्ली से शिक्षाविद् व कवयित्री चंद्रमणि ‘मणिका’। गुरुग्राम से हरियाणा गौरव सुनील शर्मा आदि साहित्यकारों ने आजादी की गौरव गाथा लिखने वाले शहीदों, वीरांगनाओं व क्रांतिवीरों के सम्मान में कविता, गजल और देशभक्ति गीत प्रस्तुत कर राष्ट्रीय कवि सम्मेलन को ऐतिहासिक बना दिया। पिलानी राजस्थान से इंजीनियर अमित करोल व विनीता नारनौलिया। फरीदाबाद से विकास अरोरा, गोवा से विकास कुमार, भिवाड़ी से राजेंद्र कुमार, ओडिशा से संघमित्रा राएगुरु, जम्मू कश्मीर से अनु अत्री ‘याद’। हरिद्वार से पूजा अरोरा, प्रयागराज से ललिता पाठक, गुजरात से अल्पा मेहता, बख्तावरपुरा से पवन शर्मा, सूरजगढ़ से शिक्षाविद् राधेश्याम बाकोलिया, प्रधानाचार्य सुरेश कुमार नारनोलिया, मुकुंदगढ़ से बृजेश इंडालिया (बबलू ), कॉपर खेतड़ी नगर से पार्वती देवी, सूरजगढ़ से सुनील गाँधी व इन्द्र सिंह शिल्ला आदि ने राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में भाग लिया।

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