Archive Notice: This article was originally published on 25 फ़रवरी 2023.
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संघर्ष समिति महासचिव डॉ योगेश आर्य ने बताया कि नीम का थाना पशु गणना और पशुपालकों की संख्या के हिसाब से जिला कार्यालय और पॉलीक्लॉनिक के सभी मानदंड पूरे करता है। नीम का थाना क्षेत्र में कुछ गांव तो सीकर जिला मुख्यालय से 125 किमी तक दूर हैं। तथा पशुपालन विभाग की योजनाओं की बेहतर मॉनिटरिंग और प्रभावी क्रियांवती के लिए जिला कार्यालय की स्थापना अति आवश्यक है। नीम का थाना में वेटरनरी पॉलीक्लिनिक बनने से नीम का थाना, पाटन, श्रीमाधोपुर, खंडेला, खेतड़ी और उदयपुरवाटी का पशुधन और पशुपालक लाभान्वित होंगे। इन तहसीलों को मिलाकर कुल 11 लाख पशुधन को उत्कृष्ट पशु चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होगी। जिला कार्यालय बनने से 247 पशु चिकित्सा संस्थाओं और 667 पशु चिकित्सा विभागीय कार्मिकों का प्रयवेक्षण और बेहतर प्रशासन सुनिश्चित हो सकेगा। पशुपालन जिला कार्यालय की मांग तो “जीरो बजट” वाली है। कुचामन सिटी में भी डिप्टी डायरेक्टर को डीडीओ पॉवर दी हुई है और नीम का थाना में पहले से ही डिप्टी डायरेक्टर का पद स्वीकृत है। क्षेत्र के पशुपालकों को पॉलीक्लिनिक बनने से काफी लाभ होगा। बड़े और छोटे पशुओं के ऑपरेशन थियेटर बनेंगे।

रैली में संघर्ष समिति अध्यक्ष डॉ रणजीत मेहरानियां, महासचिव डॉ योगेश आर्य, उपाध्यक्ष डॉ रामावतार बायला, डॉ महिपाल काजला, डॉ जयपाल गुर्जर, सुरेश गुर्जर, राजेंद्र यादव, सत्यवीर, टिंकू, विक्रम, रविन्द्र, पुष्पेंद्र, प्रवीण, कमलेश, सुनील, विरेंद्र, उमेश और कमल समेत सभी अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहें।

“नीम का थाना में ‘वेटरनरी पॉलीक्लिनिक’ स्थापित होने की जरूरत :-

पशुचिकित्सा के क्षेत्र पशुपालकों के पशुओं की विशिष्ठ चिकित्सा व्यवस्था हेतु ‘वेटरनरी पॉलीक्लॉनिक’ की स्थापना आवश्यक है। राजस्थान में पहले जिला स्तर पर ही पॉलीक्लिनिक होते थे परंतु सबसे पहले कुचामनसिटी में तहसील स्तर पर ही “पॉलीक्लिनिक” की स्थापना की गई। पिछले वर्ष नवलगढ़ और चाकसू में और इस बजट में भी 5 नए पॉलीक्लिनिक स्थापित की गए है जिनकी तुलना में ‘नीम का थाना’ भी पॉलीक्लिनिक बनने की सारी क्षमता रखता है। पॉलीक्लिनिक में कुल 3 बड़े सेक्शन होते है। पशु मादारोग विशेषज्ञो का ‘गाईनेकोलॉजी सेक्शन’ तथा सर्जन का ‘सर्जरी सेक्शन’ के साथ साथ ‘सामान्य चिकित्सा हेतु ‘जनरल मेडिसिन सेक्शन’ होता है। पॉलीक्लिनिक में एक्स-रे, सोनोग्राफी जैसी जांचों की सुविधा भी होती है जिनसे पशुओं के काफी जटिल रोग भी पकड़ में आ जाते है। संघर्ष समिति महासचिव डॉ योगेश आर्य ने बताया कि नीम का थाना में नवीनतम पशुगणना के अनुसार 105583 भैंस, 17297 गाय, 149041 बकरियां, 21492 भेड़, 893 ऊंट, 1547 सुअर और 2235 अन्य पशु मिलाकर कुल 2,98,088 पशुधन है। इतने पशुधन की विशिष्ठ चिकित्सा व्यवस्था हेतु पॉलीक्लिनिक बनने पर उसमें 1 उपनिदेशक, 3 वरिष्ठ पशुचिकित्सा अधिकारी, 3 पशुचिकित्सा अधिकारी, 2 पशुचिकित्सा सहायक, 4 पशुधन सहायक, 6 पशुधन परिचर, 1 कनिष्ठ सहायक, 1 वरिष्ठ सहायक, 1 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, 1 X-ray टैकनिशियन और 1 सफाईकर्ता समेत कुल 24 पद सृजित होंगे जिससे नीम का थाना में पशुचिकित्सा व्यवस्थाएं सुदृढ़ होंगी। पशुपालको के पशुओं के सिजेरियन, पशु बांझपन उपचार,रूमेंनोटॉमी, डायपफ्रामेटिक हर्निया ऑपरेशन,यूरेथ्रोटॉमी, कुत्तों की नसबंदी,हॉर्न कैंसर ऑपरेशन जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। छोटे और बड़े पशुओं के ऑपरेशन थियेटर बनेंगे। पॉलीक्लिनिक बनने से नीम का थाना ब्लॉक के अलावा पाटन, खेतड़ी, कोटपुतली समेत उदयपुरवाटी,श्रीमाधोपुर और खंडेला के सीमावर्ती इलाकों के पशुपालक भी लाभान्वित होंगे। संघर्ष समिति महासचिव डॉ योगेश आर्य ने बताया कि पॉलीक्लिनिक की स्थापना से आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होने लगेगी, पॉलीक्लिनिक 2 पारियों में संचालित होता है जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में हॉस्पिटल उपकेंद्र बंद होने के बाद पॉलीक्लिनिक में लाकर उपचार करवाया जा सकेगा, उपचाराधीन पशु इंडोर वार्ड में पशु रखे जा सकेंगे। जांच के अभाव में पशु नही मरेंगे। पशुपालक का समय और बाहर महंगी जांचों में लगने वाला पैसा बचेगा।

अब तक ये प्रयास हो चुके हैं:-
नीम का थाना क्षेत्र के सभी जन प्रतिनिधियों जिसमे सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य शामिल है ने मुख्यमंत्री, पशुपालन मंत्री को पत्र लिखा है। विधायक महोदय से वेटरनरी डॉक्टर्स का शिष्ट मंडल 4 बार मिला और विधायक महोदय काफी सकारात्मक है। जयपुर में मुख्यमंत्री सलाहकर निरंजन आर्य और पशुपालन निदेशक को ज्ञापन दिया जा चुका है। पिछले दिनों नीम का थाना में भी एक विशाल रैली का आयोजन किया गया था। सोशल मीडिया पर भी आमजन इसकी मांग कर रहा है।

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