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अमेरिकी डालर के मुकाबले भारतीय रुपये की गिरावट रुकने का नाम नहीं ले रही है। तेल की कीमतों का असर भारतीय रुपये पर दिखाई दे रहा है। इस सप्ताह में रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ है और प्रतिदिन निचले स्तर को छुता जा रहा है।
बुधवार को भी भारतीय रुपये में भारी गिरावट देखने को मिली। जहां पर भारतीय रुपया 97 रुपये के करीब पहुंच गया है। अगर ऐसा ही चलता रहा है तो अगले सप्ताह तक भारतीय रुपये एक डालर के मुकाबले शतक को छु लेगा।
रुपये की गिरती कीमतों के चलते भारतीय शेयर बाजार भी दबाव आ रहा है। इसके अलावा तेल की बढ़ती की कीमतों के चलते देश में महंगाई की दर तेजी से बढ़ रही है। रुपये के रसातल की ओर से जाने से चालू खाता घाटा (current account deficit – CAD) कम हो रहा है।
इससे भारत की चिंता बढ़ गई है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर रुपये और करंट अकाउंट डेफिसिट को संभालने के लिए कौन सी तरकीब निकाली जाए। आरबीआई भी रुपये को संभालने के लिए कई हजार करोड़ रुपये के डॉलर की शॉर्ट सेलिंग कर चुका है।
ऐसे में एक ऐसा निर्यात है जिसे बढ़ाकर भविष्य में रुपये में जोश भरा जा सकता है और वह वर्कफोर्स है। सरकार इसी की सक्रिय रूप से योजना बना रही है। इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक, विदेश मंत्रालय ने कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय से
इजरायल के लिए कुशल श्रमिकों (skilled worker) की तैनाती की प्रक्रिया को, सुरक्षित सरकारी-से-सरकारी (G2G) माध्यमों के जरिए, तेजी से आगे बढ़ाने की कोशिश शुरू कर दी है।
