Archive Notice: This article was originally published on 13 फ़रवरी 2026.
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राष्ट्रीय महिला दिवस: महिला शक्ति का सम्मान

लेखक – धर्मपाल गाँधी

हर वर्ष 13 फरवरी को देशभर में राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। यह दिन महिलाओं की सांस्कृतिक, सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक उपलब्धियों को सम्मान देने का अवसर है।

यह दिवस महान स्वतंत्रता सेनानी और कवयित्री Sarojini Naidu की जयंती पर मनाया जाता है, जिन्हें भारत कोकिला के नाम से जाना जाता है।


सरोजिनी नायडू: जीवन परिचय

सरोजिनी नायडू का जन्म 13 फरवरी 1879 को हैदराबाद में हुआ था। वे बचपन से ही मेधावी छात्रा थीं और कई भाषाओं की जानकार थीं।

मात्र 13 वर्ष की आयु में उन्होंने अपनी पहली कविता लिखी। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने लंदन के किंग्स कॉलेज और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में अध्ययन किया।

उनकी कविताओं में देशभक्ति, प्रकृति, प्रेम और सामाजिक चेतना की झलक मिलती है।


स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका

सरोजिनी नायडू ने महात्मा गांधी के नेतृत्व में चले आंदोलनों में सक्रिय भाग लिया।

उन्होंने:

  • असहयोग आंदोलन
  • नमक सत्याग्रह
  • सविनय अवज्ञा आंदोलन
  • भारत छोड़ो आंदोलन

में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

1925 में वे इंडियन नेशनल कांग्रेस की पहली भारतीय महिला अध्यक्ष बनीं। आजादी के बाद वे उत्तर प्रदेश की प्रथम महिला राज्यपाल बनीं।

उनका मानना था कि,

“महिलाओं की स्वतंत्रता के बिना देश की स्वतंत्रता अधूरी है।”


महिलाओं के अधिकारों की प्रबल आवाज

सरोजिनी नायडू ने महिलाओं को मताधिकार दिलाने और उन्हें समाज में समान अधिकार दिलाने के लिए संघर्ष किया।

उन्होंने महिलाओं को शिक्षा, आत्मनिर्भरता और नेतृत्व के लिए प्रेरित किया।

उनकी बेटी पद्मजा नायडू ने भी स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान दिया और बाद में राज्यपाल बनीं।


क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय महिला दिवस?

राष्ट्रीय महिला दिवस केवल एक स्मृति दिवस नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के संघर्ष, आत्मबल और उपलब्धियों का प्रतीक है।

सरोजिनी नायडू ने अपने जीवन से यह संदेश दिया कि:

  • महिलाएं नेतृत्व कर सकती हैं
  • महिलाएं समाज बदल सकती हैं
  • महिलाएं राष्ट्र निर्माण की आधारशिला हैं

2 मार्च 1949 को उनका निधन हुआ, लेकिन उनकी विरासत आज भी प्रेरणा देती है।


आज के संदर्भ में महत्व

आज जब देश में महिला सशक्तिकरण की चर्चा हो रही है, तब सरोजिनी नायडू का जीवन युवतियों और महिलाओं के लिए प्रेरणा है।

राजस्थान सहित पूरे देश में विद्यालयों, महाविद्यालयों और सामाजिक संस्थाओं द्वारा इस दिन कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

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