Archive Notice: This article was originally published on 22 जनवरी 2026.
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1965 के शहीद के सम्मान में पूर्व सैनिक मैदान में

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” style=”border: 0px; overflow: hidden;” width=”640″>झुंझुनूं। 1965 के भारत–पाकिस्तान युद्ध में शहीद हुए फैयाज मोहम्मद खान की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए गौरव सेनानी सेवा समिति, झुंझुनूं ने प्रशासन से ठोस पहल की मांग की है।

समिति के पदाधिकारियों ने जिला कलेक्टर अरुण गर्ग से मुलाकात कर एक मांग पत्र (ज्ञापन) सौंपा।

 बामनवास में स्मारक निर्माण की मांग

ज्ञापन में शहीद फैयाज मोहम्मद खान के पैतृक गांव बामनवास में

  • स्मारक निर्माण हेतु उचित भूमि आवंटन

  • सरकारी स्कूल का नामकरण शहीद के नाम पर

करने की मांग की गई है।

 1965 युद्ध में टैंक चालक के रूप में दी शहादत

समिति अध्यक्ष रिटायर्ड कैप्टन अनिल कुमार ढाका ने बताया कि
शहीद फैयाज मोहम्मद खान, बामनवास निवासी थे और
वे 1965 के भारत–पाक युद्ध में टैंक चालक के रूप में देश की सेवा कर रहे थे।
कम उम्र में ही उन्होंने मातृभूमि की रक्षा करते हुए वीरगति प्राप्त की।

 वीरांगना की भावना को दिया गया स्वर

शहीद फैयाज खान की कोई संतान नहीं थी।
उनकी पत्नी वीरांगना जैतुन बानो ने दोबारा विवाह नहीं किया और
जीवनभर अपने पति के बलिदान को सम्मान के साथ संजोए रखा।

अब वृद्धावस्था में उन्होंने इच्छा जताई कि

“पति के पराक्रम को एक स्मारक के रूप में अमर किया जाए।”

गौरव सेनानी सेवा समिति ने इसी भावना को आगे बढ़ाया है।

 आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा स्मारक

समिति का कहना है कि स्मारक

  • शहीद की याद को जीवित रखेगा

  • युवाओं में देशभक्ति, कर्तव्य और बलिदान की भावना जागृत करेगा

यह पहल पूर्व सैनिकों और सामाजिक संगठनों द्वारा शहीदों के सम्मान में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है।

 शीघ्र कार्रवाई की मांग

समिति ने प्रशासन से आग्रह किया है कि

  • भूमि आवंटन की प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाए

  • स्मारक निर्माण कार्य को जल्द गति दी जाए