Archive Notice: This article was originally published on 31 मई 2026.
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झुंझुनूं उपभोक्ता आयोग ने 20 दिनों में निपटाए 117 मामले

झुंझुनूं, देशभर में अदालतों में लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण को लेकर चर्चा के बीच झुंझुनूं जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक मिसाल पेश की है। आयोग ने मई माह के सिर्फ 20 कार्यदिवसों में 117 उपभोक्ता मामलों का निस्तारण कर पीड़ित उपभोक्ताओं को समय पर राहत प्रदान की है।

न्याय टेबल और प्री-काउंसलिंग का दिखा असर

आयोग अध्यक्ष मनोज कुमार मील द्वारा शुरू की गई ‘न्याय टेबल’ और प्री-काउंसलिंग व्यवस्था इस सफलता की प्रमुख वजह मानी जा रही है। इन नवाचारों का उद्देश्य उपभोक्ताओं को लंबी कानूनी प्रक्रिया से राहत दिलाते हुए मामलों का शीघ्र समाधान करना है।

आयोग में आने वाले प्रत्येक मामले को प्रारंभिक स्तर पर प्री-काउंसलिंग से गुजारा गया, जिससे कई विवाद शुरुआती चरण में ही सुलझ सके और सुनवाई की प्रक्रिया तेज हुई।

101 मामलों में फैसला, 16 का समझौते से निस्तारण

मई माह के दौरान आयोग ने कुल 117 मामलों का निपटारा किया। इनमें से:

  • 101 मामलों में पूर्ण ट्रायल के बाद निर्णय सुनाया गया
  • 16 मामलों का न्याय टेबल पर आपसी सहमति और समझाइश से समाधान किया गया

यह प्रदर्शन राज्य आयोग द्वारा निर्धारित मानकों से कहीं बेहतर माना जा रहा है।

राज्य सरकार की नीति का प्रभावी क्रियान्वयन

राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में उपभोक्ता मामलों के विभाग ने त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए विशेष नीति बनाई थी। इसके तहत राज्य उपभोक्ता आयोग ने प्रतिदिन मामलों के निस्तारण के लिए प्रदर्शन मानक तय किए थे।

झुंझुनूं आयोग ने इन निर्देशों का प्रभावी पालन करते हुए अपेक्षा से अधिक मामलों का निस्तारण किया है।

अध्यक्ष मनोज मील ने क्या कहा?

आयोग अध्यक्ष मनोज कुमार मील ने लंबित मामलों में तेजी लाने के लिए प्रथम राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान सभी पक्षकारों को 15 दिनों के भीतर आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करने के निर्देश दिए थे।

इस पहल का सीधा असर सुनवाई की गति पर पड़ा और मामलों के निस्तारण में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई।

कानूनी विशेषज्ञों ने बताया प्रभावी मॉडल

कानूनी क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि न्याय टेबल, प्री-काउंसलिंग और समयबद्ध सुनवाई का यह मॉडल उपभोक्ता विवादों के समाधान के लिए बेहद प्रभावी साबित हो रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार इससे न केवल मामलों का तेजी से निस्तारण हो रहा है बल्कि आम नागरिकों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा भी मजबूत हो रहा है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह उपलब्धि?

ज्येष्ठ माह की भीषण गर्मी के बीच 20 कार्यदिवसों में 117 मामलों का निस्तारण यह दर्शाता है कि यदि न्यायिक प्रक्रियाओं में नवाचार और समयबद्धता लाई जाए तो आम लोगों को त्वरित न्याय मिल सकता है। झुंझुनूं उपभोक्ता आयोग की यह पहल अन्य जिलों के लिए भी एक प्रेरणादायक मॉडल बन सकती है।

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