Archive Notice: This article was originally published on 8 जून 2026.
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झुंझुनूं के सरकारी अस्पतालों में दो साल की ओपीडी पर्चियों का ऑडिट, फर्जी क्लेम पर होगी जांच

झुंझुनूं जिले के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में पिछले दो वर्षों के दौरान जारी हुई ओपीडी पर्चियों (Prescription Slips) की विशेष जांच कराई जाएगी। चिकित्सा विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से प्रिस्क्रिप्शन ऑडिट शुरू करने के निर्देश जारी किए हैं।

इस कार्रवाई का उद्देश्य आरजीएचएस (RGHS) के तहत हुए क्लेम, उपचार प्रक्रियाओं और दवा वितरण में संभावित अनियमितताओं की जांच करना है।

11 महीने पहले भी दिए गए थे निर्देश

जानकारी के अनुसार चिकित्सा विभाग ने करीब 11 महीने पहले भी इसी तरह का ऑडिट कराने के निर्देश जारी किए थे। हालांकि अधिकांश चिकित्सा अधिकारियों द्वारा निर्धारित समय में रिपोर्ट नहीं भेजी गई।

अब विभाग ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए दोबारा सभी मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्य, चिकित्सा अधीक्षक, सीएमएचओ, पीएमओ और बीसीएमओ को जांच पूरी कर रिपोर्ट भेजने के आदेश दिए हैं।

किन बिंदुओं की होगी जांच?

चिकित्सा विभाग ने ऑडिट के दौरान कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच करने को कहा है। इनमें शामिल हैं:

  • बिना क्लिनिकल परीक्षण के जारी की गई ओपीडी पर्चियां
  • लैब जांच या डायग्नोस्टिक रिपोर्ट के बिना उपचार
  • निजी चिकित्सकों के परामर्श के आधार पर सरकारी पर्चियां जारी करने के मामले
  • एक ही परिवार के कई सदस्यों को एक जैसी बीमारी दर्शाने के मामले
  • महंगी दवाइयां लिखकर फर्जी क्लेम उठाने की आशंका
  • मेडिकल स्टोर, डेटा ऑपरेटर और संविदा कर्मियों की संभावित मिलीभगत

फील्ड विजिट के दौरान होगी विशेष निगरानी

विभाग ने ब्लॉक और जिला स्तर के निरीक्षण अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे फील्ड विजिट के दौरान रिकॉर्ड की विशेष जांच करें। खासकर संविदा कर्मियों, डेटा एंट्री ऑपरेटरों और मेडिकल स्टोर से जुड़े मामलों पर नजर रखने को कहा गया है।

क्या बोले सीएमएचओ?

झुंझुनूं सीएमएचओ डॉ. छोटेलाल गुर्जर ने बताया,

“चिकित्सा विभाग ने सरकारी अस्पतालों में पिछले दो वर्षों के दौरान जारी हुई ओपीडी पर्चियों की गहन जांच के निर्देश दिए हैं। जांच पूरी कर रिपोर्ट विभाग को भेजी जाएगी।”

आरजीएचएस क्लेम की भी होगी समीक्षा

सूत्रों के अनुसार ऑडिट के दौरान राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) के तहत हुए क्लेम और उनके आधार पर जारी हुई ओपीडी पर्चियों की भी समीक्षा की जाएगी। इससे सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और अनियमितताओं पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

झुंझुनूं के मरीजों पर क्या असर पड़ेगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस जांच से सरकारी अस्पतालों में रिकॉर्ड प्रबंधन मजबूत होगा और फर्जी दावों पर रोक लग सकेगी। साथ ही वास्तविक मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता में सुधार होने की संभावना है।

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