Archive notice This article was published on 19 May 2026 and reflects conditions at the time of publication. Information, figures, and context may have changed since.

चूरू जिले के राजलदेसर राजकीय चिकित्सालय में मरीज रामलाल भाट की मौत के बाद मंगलवार को माहौल तनावपूर्ण बना रहा। परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टर पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल के बाहर धरना शुरू कर दिया।

मामले ने तूल पकड़ने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालनी पड़ी।

समय पर रेफर नहीं करने का आरोप

मृतक के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर कपिल धाभाई ने मरीज को समय पर रेफर नहीं किया।

परिजनों के अनुसार रामलाल को सुबह करीब 9 बजे अस्पताल में भर्ती करवाया गया था, लेकिन हालत गंभीर होने के बावजूद दोपहर बाद बीकानेर रेफर किया गया।

बीकानेर पहुंचने पर डॉक्टरों ने मरीज को मृत घोषित कर दिया।

“अगर समय पर रेफर किया जाता तो शायद जान बच सकती थी।” परिजन

अस्पताल के बाहर धरना, कई संगठन पहुंचे

मरीज की मौत के बाद परिजनों ने शव को डी-फ्रिज में रखकर अस्पताल के बाहर धरना शुरू कर दिया।

धरने में भीम आर्मी, किसान सभा, मेघवाल महासभा सहित कई सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के पदाधिकारी शामिल हुए।

धरने के समर्थन में विधायक पुसाराम गोदारा, पूर्व पालिका अध्यक्ष गोपाल मारू, हंसराज पारीक, मोहम्मद जब्बार खोखर, भादर भाम्भू और श्रवण बारूपाल सहित कई लोग मौजूद रहे।

प्रशासन और धरनार्थियों के बीच लंबी वार्ता

घटना की सूचना मिलते ही सीआई सुरेंद्र बारूपाल, बीसीएमएचओ मनीष तिवारी, तहसीलदार हरदीप सिंह, उपखंड अधिकारी मिथलेश कुमार और बाद में सीएमएचओ डॉ मनोज शर्मा मौके पर पहुंचे।

अधिकारियों ने धरनार्थियों से कई दौर की वार्ता की। शुरुआत में सहमति नहीं बनी, लेकिन बाद में प्रशासन के आश्वासन के बाद मामला शांत हुआ।

तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित

सीएमएचओ डॉ मनोज शर्मा ने बताया कि पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई है।

इस कमेटी में जिला अस्पताल के सर्जन, फिजिशियन और एक प्रशासनिक अधिकारी शामिल रहेंगे।

उन्होंने कहा कि यदि जांच में चिकित्सकीय लापरवाही सामने आती है तो संबंधित डॉक्टर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

डॉक्टर को मुख्यालय भेजा गया

प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से डॉक्टर को मुख्यालय भेज दिया है। वहीं अस्पताल की व्यवस्था प्रभावित नहीं हो, इसके लिए नए डॉक्टर लगाने की बात कही गई है।

परिजनों को मुआवजे का आश्वासन

उपखंड अधिकारी मिथलेश कुमार ने बताया कि मृतक के परिजनों को चिरंजीवी योजना के तहत 5 लाख रुपये और मुख्यमंत्री सहायता कोष से 10 लाख रुपये दिलाने का प्रस्ताव सरकार को भेजा जाएगा।

साथ ही एमआरएस बैठक के जरिए परिवार के एक सदस्य को संविदा पर नौकरी देने का भी आश्वासन दिया गया।

मेडिकल बोर्ड से हुआ पोस्टमार्टम

वार्ता के बाद परिजन सहमत हुए, जिसके बाद शव को जिला अस्पताल रतनगढ़ की मोर्चरी में रखवाकर मेडिकल बोर्ड से वीडियोग्राफी के साथ पोस्टमार्टम करवाया गया।

इसके बाद शव परिजनों को सुपुर्द कर दिया गया।

सात दिन में आएगी रिपोर्ट

विधायक पुसाराम गोदारा ने बताया कि जांच कमेटी और मेडिकल रिपोर्ट करीब 7 दिन में आ जाएगी।

उन्होंने कहा कि यदि डॉक्टर की लापरवाही साबित होती है तो मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।