Sucess Story HCS Topper Megha: हिमाचल कि बेटी ने अपनी मेहनत और परिश्रम कि बदौलत अपने जिले का नाम रोशन किया है। उन्होंने अपने तीसरे प्रयास में टॉप स्थान हाशिल किया है। अधिक जानकारी के लिए बता दे कि हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग ने हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा (एचएएस) की प्रतियोगी परीक्षा-2025 का अंतिम परिणाम घोषित कर दिया है। सिरमौर जिले के राजगढ़ की मेघा सिंह कंवर टापर बनी हैं। मेघा सामान्य वर्ग के तहत इकलौती एचएएस पद के लिए चयनित हुई हैं।
35 पदों में से 30 अभ्यर्थियों को विभिन्न सेवाओं के लिए अनुशंसित
अधिक जानकरी के लिए बता दे कि प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार (पर्सनैलिटी टेस्ट) के आधार पर आयोग ने 35 पदों में से 30 अभ्यर्थियों को विभिन्न सेवाओं के लिए अनुशंसित किया है, जबकि पांच पद रिक्त रह गए हैं। इसके लिए योग्य अभ्यर्थी नहीं मिले हैं। इनमें से एक एचएएस, दो एचपीएस, आठ बीडीओ, नौ तहसीलदार, दो जिला नियंत्रक और आठ सहायक आयुक्त चयनित हुए हैं।
सेवा आयोग के अध्यक्ष ने दी ये जानकारी
राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कहा कि पहली बार हुआ कि एक साल से भी कम समय में आवेदन से लेकर परीक्षा परिणाम को घोषित किया है। इससे पहले परिणाम निकालने में दो से तीन वर्ष लग जाते थे। आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार चयन मेरिट क्रम के आधार पर किया गया है और अभ्यर्थियों की नियुक्ति दस्तावेज सत्यापन के अधीन रहेगी। 15 अभ्यर्थियों का चयन सामान्य श्रेणी के तहत किया गया है।
कोन है हिमचाल कि हेमा सिंह
मेघा ने हिम्मत नहीं हारी और मंजिल तक पहुंचने के लिए लगातार तैयारी जारी रखी। मार्च 2025 में एलाइड की परीक्षा पास की, मगर यहां भी अंत में किस्मत ने साथ नहीं दिया। मेघा ने जून 2025 में तीसरी बार एचएएस की परीक्षा दी। मंगलवार देर शाम घोषित परीक्षा परिणाम में उसने हिमाचल में टाप किया।
मेघा बागवान एक सामान्य परिवार से
मेघा बागवान नरेंद्र ठाकुर की बेटी हैं। भाई करण कंवर सिपाही के पद पर कार्यरत है, जबकि माता अनीता ठाकुर गृहिणी हैं। मेघा ने प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय स्कूल से की। छठी कक्षा में चयन जवाहरलाल नेहरू नवोदय विद्यालय नाहन के लिए हो गया। नवोदय स्कूल से 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद डा. वाईएस परमार वानिकी एवं बागवानी विश्वविद्यालय नौणी से बीएससी तथा एमएससी वानिकी विषय में की। मेघा एमएससी में गोल्ड मेडलिस्ट हैं। मेघा ने सफलता का श्रेय माता-पिता और गुरुजनों को दिया है।