सूरजगढ़ उपखंड के काजड़ा गांव में संविधान दिवस के अवसर पर एक विशेष सभा का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय सरपंच संघ की उपाध्यक्ष मंजू तंवर ने की।
सभा की शुरुआत में स्वतंत्रता सेनानियों, शहीदों और संविधान निर्माताओं को नमन किया गया।
“भारत का संविधान — हमारा स्वाभिमान”
कार्यक्रम का संचालन कर रहे शिक्षाविद् और समाजसेवी मनजीत सिंह तंवर ने कहा—
“भारतीय संविधान हमारा स्वाभिमान और सर्वोच्च विधान है। यह विश्व का सबसे लंबा हस्तलिखित संविधान है, जो आज भी संसद में सुरक्षित है।”
उन्होंने बताया कि—
- संविधान 26 नवंबर 1949 को पारित हुआ
- 26 जनवरी 1950 से लागू हुआ
- संविधान विधानसभा में 389 सदस्य थे (विभाजन के बाद 299)
- इसकी निर्माण प्रक्रिया 1946 से 1949 तक चली
उन्होंने संविधान निर्माण की प्रत्येक महत्वपूर्ण तारीख और प्रक्रिया का विस्तार से वर्णन किया।
धर्मपाल गांधी ने बताया—संविधान संघर्ष और बलिदान की उपज
आदर्श समाज समिति इंडिया के अध्यक्ष धर्मपाल गांधी ने कहा—
“स्वतंत्रता सेनानियों के साहस और बलिदान की वजह से ही हम संविधान लिखने की स्थिति में आए थे।”
उन्होंने संविधान सभा के गठन, डॉ. राजेंद्र प्रसाद की भूमिका,
उद्देश्य प्रस्ताव और प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर के योगदान पर विस्तृत प्रकाश डाला।
महिलाओं की भूमिका पर भी चर्चा
सभा में बताया गया कि संविधान सभा में 15 महिलाएं शामिल थीं, जिन्होंने संविधान निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
सभा में उपस्थित लोगों ने संविधान निर्माण की पूरी ऐतिहासिक यात्रा को बड़े ध्यान से सुना।
“संविधान न्याय, स्वतंत्रता और समानता का प्रतीक” — मंजू तंवर
कार्यक्रम की अध्यक्ष मंजू तंवर ने कहा—
“भारतीय संविधान असंख्य विविधताओं को समेटे हुए है।
यह न्याय, स्वतंत्रता और समानता का प्रतीक है, जिस पर हर भारतीय को गर्व है।”
उन्होंने संविधान दिवस पर लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कई गणमान्य लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में काजड़ा ग्राम पंचायत प्रशासक राकेश कुमार,
शिक्षाविद् जगदीश प्रसाद सैन, राय सिंह शेखावत,
होशियार सिंह सिंगाठिया, अनिल जांगिड़, सुरेश शेखावत,
अवनीश पाठक, पूजा स्वामी, अक्षय शर्मा,
कपिल गुर्जर सहित अनेक ग्रामीण व सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में मंजू तंवर ने सभी का आभार व्यक्त किया।