Posted inJhunjhunu News (झुंझुनू समाचार)

Jhunjhunu: कलेक्ट्रेट पर किसान-मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ धरना

Farmers protest at Jhunjhunu collectorate demanding MSP and reforms

झुंझुनूं संयुक्त किसान मोर्चा और केंद्रीय श्रम संगठनों के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर
झुंझुनूं जिला कलेक्ट्रेट पर बड़े स्तर पर धरना और विरोध प्रदर्शन किया गया।

यह धरना किसान आंदोलन की पाँचवीं वर्षगांठ पर केंद्र सरकार की
किसान-मजदूर विरोधी नीतियों के विरोध में आयोजित हुआ।

कई किसान व मजदूर संगठनों की भागीदारी

धरने में शामिल प्रमुख संगठन—

  • अखिल भारतीय किसान सभा
  • अखिल भारतीय किसान महासभा
  • क्रांतिकारी किसान यूनियन
  • जय किसान आंदोलन
  • सीटू, एटक और एक्टू जैसे श्रम संगठन

धरना पांच सदस्यीय अध्यक्ष मंडल—
कामरेड फूलचंद ढेवा, बिड़दूराम सैनी, पोकर सिंह झाझडिया,
सुमेर सिंह बुडानिया और कप्तान शुभकरण सिंह महला की अध्यक्षता में हुआ।

मुख्य मांगें — MSP गारंटी से लेकर बिजली मुफ्त तक

धरने में किसानों और श्रमिकों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर 20+ मांगें उठाई गईं, जिनमें—

प्रमुख किसान मुद्दे

  • MSP को C2+50% लाभ के साथ कानूनी गारंटी
  • असमय बारिश से फसलों में नमी सीमा 17% से बढ़ाकर 22% करने की मांग
  • किसानों को ब्याजमुक्त ऋण
  • व्यापक कर्ज माफी योजना
  • FTA (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) का विरोध
  • PDS व FCI को संरक्षित रखने की मांग
  • 84,000 करोड़ की खाद सब्सिडी बहाली

श्रमिक व आमजन से जुड़ी मांगें

  • चार श्रम संहिता कानून रद्द किए जाएं
  • बिजली सुधार विधेयक 2025 वापस लिया जाए
  • स्मार्ट मीटर बंद किए जाएं
  • सभी परिवारों को 300 यूनिट बिजली मुफ्त
  • न्यूनतम वेतन ₹26,000 प्रति माह
  • असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों व गरीब किसानों को ₹10,000 मासिक पेंशन
  • मनरेगा में 200 दिन काम और ₹700 दैनिक मजदूरी
  • भूमि अधिग्रहण से पहले पुनर्वास अनिवार्य

स्थानीय मांगे — झुंझुनूं विशेष

  • झुंझुनूं जिले में यमुना नहर का पानी शीघ्र लाने की मांग
  • खेतड़ी कॉपर कॉम्प्लेक्स के स्मेल्टर-रिफाइनरी का उत्पादन फिर शुरू करने की मांग
  • जिले में सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल रीसायकल प्लांट लगाने का प्रस्ताव

कलेक्टर को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा

किसान संगठनों ने सभी मांगों को लेकर राष्ट्रपति के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।

धरने के अंत में श्रम कानूनों के विरोध में
चार श्रम संहिता की प्रतियां सार्वजनिक रूप से जलाई गईं।

नेताओं ने सरकार पर साधा निशाना

कई किसान व श्रमिक नेताओं ने धरने को संबोधित किया, जिनमें—
कामरेड फूलचंद ढेवा, फूलचंद बर्वर, रामचंद्र कुलहरि,
बिड़दूराम सैनी, गजराज कटेवा, मनफूल सिंह,
गिरधारीलाल महला, कैलाश यादव, पोकर सिंह झाझडिया आदि शामिल रहे।

उन्होंने कहा—
“सरकार की नीतियाँ किसान और मजदूर दोनों को नुकसान पहुँचा रही हैं।
जब तक MSP गारंटी और श्रमिक अधिकार बहाल नहीं होते, आंदोलन जारी रहेगा।”