Information, figures, and context may have changed since the time of publication.
स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासन की उदासीनता के कारण लंबे समय तक चली लड़ाई के बाद घांघू के शहीद राजेश फगेड़िया की शहादत को न्याय मिला है। शहादत के बाद तत्काल बाद प्रस्ताव दिए जाने के बावजूद करीब आठ वर्ष बाद अब घांघू के राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय का नामकरण शहीद के नाम से किए जाने को स्वीकृति मिली है। विद्यालय नामकरण के लिए लगातार प्रयासरत रहे सामाजिक कार्यकर्ता महावीर नेहरा ने बताया कि शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा की संवेदनशीलता से राज्य सरकार ने हाल ही में इस नामकरण की स्वीकृति जारी की है, जिसके बाद माध्यमिक शिक्षा निदेशक नथमल डिडेल ने स्कूल के नामकरण के निर्देश शिक्षा विभाग के अधिकारियों को जारी किए हैं। शहादत के इतने वर्ष बाद स्कूल का नामकरण किए जाने के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि राजेश फगेड़िया 28 जनवरी 2011 में सिचायिन ग्लेशियर में अपनी तैनाती के दौरान आॅपरेशन मेघदूत में शहीद हो गए थे। जिला सैनिक कल्याण कार्यालय ने हालांकि तत्काल कार्यवाही शुरू करते हुए नामकरण की कार्यवाही और पत्र-व्यवहार शुरू कर दिया था लेकिन ग्राम पंचायत और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के कारण यह प्रस्ताव लंबित होता रहा और राज्य सरकार की ओर से कोई कार्यवाही नहीं की गई। समाचार पत्रों सहित विभिन्न मंचों से यह बात उठाए जाने पर भी कोई फायदा नहीं हुआ। उल्टे पूर्ववर्ती सरकार में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की शह पर शहीद परिजनों को प्रताड़ित करने का काम किया गया और 22 अक्टूबर 2016 को शहीद वीरांगना मधु फगेड़िया का स्थानांतरण गांव के बालिका विद्यालय से रणवीर सिंह फगेड़िया के स्थान पर राणासर कर दिया गया, जिस पर वीरांगना ने उच्च न्यायालय में सिविल रिट दायर कर स्थगन प्राप्त किया। स्कूल के नामकरण शहीद राजेश के नाम से किए जाने पर परिजनों एवं ग्रामीणों ने संतोष जाहिर किया है। शहीद के पिता रामलाल फगेड़िया ने बताया कि उन्हें गर्व है कि उनका बेटा देश की रक्षा के लिए शहीद हुआ है। राज्य सरकार द्वारा स्कूल के नामकरण के निर्णय किए जाने से उन्हें खुशी हुई है कि देर से ही सही, राजेश की शहादत को न्याय मिला है। गांव के सामाजिक कार्यकर्ता बीरबल नोखवाल ने बताया कि माइनस 35-40 डिग्री तापमान पर कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी करते हुए बलिदान देने वाले राजेश की शहादत का सम्मान राज्य सरकार ने स्कूल का नामकरण करके किया है, इससे सभी ग्रामीणों में खुशी की लहर है। उन्होंने कहा कि राजेश की शहादत पर हर बार लोगों ने सियासत करने की कोशिश की। चाहे शहीद स्मारक के लिए भूमि आवंटन का मामला हो, चाहे शहीद वीरांगना के पदस्थापन का प्रकरण हो चाहे स्कूल के नामकरण का। लेकिन अब स्कूल का नामकरण शहीद के नाम से करने का आदेश दिया है, जो स्वागत योग्य है।
