Archive Notice: This article was originally published on 14 जुलाई 2022.
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पट्टे से वंचित परिवारों का घर-घर जाकर होगा सर्वेक्षण

सीकर, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि प्रशासन शहरों के संग अभियान के अन्तर्गत आम लोगों को आवासीय भूमि के पट्टे देने के कार्य को समय पर पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार ने बिना पट्टे वाले घरों के नियमन में काफी रियायतें दी हैं, ताकि 15 जुलाई से शुरू हो रहे वार्डवार शिविरों में ज्यादा से ज्यादा पट्टे दिए जा सके। पहली बार इस अभियान में पट्टा जारी करने के लिए पूर्व की दरों से लगभग 85 प्रतिशत तक छूट दी गई है। निकायों के क्षेत्र में आ रही चारागाह व सिवायचक भूमि को निकायों को हस्तातंरित करने के निर्देश कलेक्टर्स को दे दिए गए हैं, ताकि उस पर बसी आबादी के पट्टे जारी हो सके।मुख्यमंत्री गुरूवार को अपने आवास पर प्रशासन शहरों के संग अभियान की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। गहलोत ने कहा कि सभी निकाय अपने राजस्व रिकॉर्ड यथाशीघ्र दुरूस्त कर लें, ताकि पट्टा वितरण में किसी तरह की अड़चन ना आए। अभियान के दौरान प्रशासन घर-घर जाकर मतदाता सूची के आधार पर पट्टा मिलने से वंचित परिवारों का सर्वेक्षण भी करेगा, ताकि जरूरतमंद लोगों को पट्टे जारी किए जा सके। उन्होंने कहा कि गरीब को न्याय देना हमेशा सरकार की प्राथमिकता रही है। उन्होंने कहा कि कच्ची बस्तियां मजबूरी में बसती हैं और बाद में उनमें मूलभूत सुविधाओं का विकास किया जाता है। राज्य में कच्ची बस्तियों के नियमन और वहां बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार गंभीर है। महिला के नाम से पट्टा जारी करने का निर्णय भी हमने किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पट्टे जारी करने के लिए प्रशासन शहरों के संग अभियान के अन्तर्गत अब प्रत्येक वार्ड में सार्वजनिक स्थल पर दो दिवस के कैम्प लगाए जाएंगे। हर सप्ताह में कलेक्टर एक बार नगर निकायों का दौरा कर इन कैम्पों का निरीक्षण करेंगे और संभागीय आयुक्त भी इस पर निगरानी रखेंगे।

पट्टे जारी करने के लिए सरकार दे रही विशेष शिथिलताएं
मुख्यमंत्री ने बताया कि अभियान के अन्तर्गत राज्य सरकार ने कृषि भूमि पर बसी कॉलोनियों के नियमन किए जाने की कट ऑफ डेट को 1999 से बढ़ाकर दिसम्बर, 2021 किया गया है। कट ऑफ डेट तक विकसित कॉलोनीयों को 70:30 अनुपात में रखकर ले-आउट प्लान स्वीकृत किया जा सकेगा। जिन कॉलोनियों में न्यूनतम 60 प्रतिशत भू-खण्डों पर निर्माण होकर लोग बस चुके हैं, वहां पर सड़क की चौड़ाई न्यूनतम 20 फीट सुनिश्चित करते हुए सर्वे के आधार पर पट्टे दिए जा सकेंगे। साथ ही, कच्ची बस्तियों के भी पट्टों की कट ऑफ डेट 2009 से बढ़ाकर दिसम्बर, 2021 कर दी है, ताकि लोगों को पट्टा मिल सके। जहां पहले कच्ची बस्ती में 10 वर्ष तक पट्टा बेचने पर पाबंदी थी, अब इसे घटाकर 3 वर्ष कर दिया गया है। इसी प्रकार नगरीय क्षेत्रों की घनी आबादी में बने हुए पुराने मकानों का 501 रूपए में पट्टा देने के लिए धारा 69-ए में काफी शिथिलताएं दी गई हैं।

लापरवाही बरतने वाले अधिकारी-कर्मचारी के विरूद्ध होगी कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिविरों में प्राप्त आवेदनों के समय पर निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि गरीब लोगों को इन शिविरों में किसी तरह की परेशानी ना हो यह सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि पट्टे प्राप्त करने से होने वाले फायदों व पट्टे नहीं मिलने से होने वाले नुकसान के बारे में लोगों को बताया जाए, ताकि लोग पट्टे जारी कराने के प्रति जागरूक हों। मुख्यमंत्री ने बताया कि शिविर में किसी भी तरह की समस्या व सुझाव देने के लिए जिला कलेक्टर कार्यलय में प्रकोष्ठ बनाए गए हैं। इन प्रकोष्ठ और हेल्पलाइन की जानकारी शिविर स्थल के बाहर बोर्ड लगाकर आमजन को दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने लॉन्च की प्रशासन शहरों के संग अभियान की वेबसाइट
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रशासन शहरों के संग अभियान की वेबसाइट भी लॉन्च की। इस वेबसाइट पर अभियान से संबंधित विभिन्न आदेश, परिपत्र आदि उपलब्ध हैं, जिससे आमजन को एक जगह पर अभियान से संबंधित सारी जानकारी प्राप्त हो सकेगी। गौरतलब है कि पूर्व में इस अभियान के अन्तर्गत 3.5 लाख पट्टे जारी किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त अन्य सेवाओं के कुल 13 लाख 22 हजार प्रकरणों का भी निस्तारण किया गया।

इस अवसर पर नगरीय विकास मंत्री श्री शांति धारीवाल ने कहा कि प्रशासन शहरों के संग अभियान के शिविरों के कुशल संचालन के लिए अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए हैं तथा कार्यशालाएं आयोजित की गई हैं। मुख्य सचिव श्रीमती ऊषा शर्मा ने कहा कि पहली बार पट्टे देने की प्रक्रिया में इतनी शिथिलताएं दी जा रही हैं, ताकि आमजन को राहत मिल सके। बैठक के दौरान यूडीएच सलाहकार जी. एस. संधू, प्रमुख सचिव वित्त अखिल अरोरा, प्रमुख शासन सचिव यूडीएच कुंजीलाल मीणा, जयपुर विकास प्राधिकरण आयुक्त रवि जैन, स्वायत्त शासन सचिव जोगाराम, स्थानीय निकाय निदेशक हृदेश शर्मा, जयपुर नगर निगम ग्रेटर आयुक्त महेन्द्र सोनी एवं नगर निगम हैरिटेज आयुक्त विश्राम मीणा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। साथ ही प्रदेशभर से विभिन्न निकायों के महापौर, सभापति व अध्यक्ष, आयुक्त, अजमेर/जोधपुर विकास प्राधिकरण, सभी जिला कलेक्टर, उपखण्ड अधिकारी एवं तहसीलदार आदि वीसी के माध्यम से जुड़े।

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