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निर्जला व्रत रखती है महिलाएं
करवा चौथ के दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखते हैं और पूरे दिन जल भी ग्रहण नहीं करती। शाम के समय करवा माता का पूजा करने के बाद महिलाएं पूजा करती हैं और चांद देखने के बाद अपने पति के हाथों जल पीकर व्रत खोलती है।
करवा चौथ के दिन सोलह सिंगार का महत्व
करवा चौथ के दिन सोलह सिंगार का विशेष महत्व है। इस दिन महिलाएं सोलह सिंगार करती है और हाथों में मेहंदी लगाती है। सोलह सिंगार करने के बाद महिलाएं अपनी पति के लंबी उम्र की कामना करती हैं और करवा माता की पूजा करती है।
आप अगर करवा चौथ का व्रत करने वाली है तो आपको करवा चौथ से जुड़े नियमों का पालन जरूर करना चाहिए। धर्मशास्त्र में करवा चौथ से जुड़े कई नियम बताए गए हैं जिसका पालन करने से व्रत का पूरा फल मिलता है और जीवन में परेशानियां नहीं आती है।
करवा चौथ के दिन पूजन का शुभ मुहूर्त
करवा चौथ 10 अक्टूबर को मनाया जाएगा और 10 अक्टूबर को शाम 5:16 से लेकर शाम 6:29 तक पूजन का शुभ मुहूर्त है। चांद निकलने का समय 7:42 पर है।
पूजन विधि
पूजा करने के लिए सबसे पहले आपको पुष्प,कच्चा दूध, शक़्कर,देसी घी, अगरबत्ती, दही,मिठाई गंगाजल अक्षत सिंदूर मेहंदी चूड़ी बिछुआ महावर गंगा बिंदी चुनरी पीली मिट्टी चलने चल का लोटा दीपक और थाली लेना होगा।
इस दिन करवा माता की पूजा विधि विधान से करना चाहिए ऐसा करने से पति के जीवन में तरक्की होती है और वैवाहिक जीवन की सभी परेशानी दूर हो जाती है।
