Archive Notice: This article was originally published on 18 फ़रवरी 2019.
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खेतड़ी [ हर्ष स्वामी ] मेरे पापा दुश्मनों को मारने गए हैं मुझे बंदूक लाकर देंगे मैं भी दुश्मनों को मारूंगा जब मीडिया टीम बसई के निजी विद्यालय में एलकेजी कक्षा में पढ़ रहे शहीद श्योराम सिराधना के बेटे कुंशक ने देश भक्ति का जज्बा दिखाते हुए कही 3 दिन पहले हुए कश्मीर के पुलवामा में सबसे बड़े आतंकी हमले में देश के 41 जवान शहीद हो गए थे । जिसमें राजस्थान के भी 4 जवान शहीद हुए थे उन जवानों की शहादत का गम पूरा देश अभी भुल भी नहीं पाया था। पुलवामा में ही बीती रात आतंकवादियों से मुठभेड़ में देश के चार लाडलो ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उसमें देश के सर्वाधिक सैनिक देने वाले राजस्थान के शेखावाटी के झुंझुनू जिले का लाल भी अपने भाई, मां और अपनी धर्मपत्नी को अलविदा कह गया। आतंकियों के साथ हुई मुठभेड में खेतड़ी तहसील के टीबा का एक लाल श्योराम शहीद हो गया। जवान के शहीद होने की सूचना पर पूरे गांव में सन्नाटा छा गया गांव में शोक की लहर सी छा गई। धीरे धीरे गांव के युवा, बुजुर्ग सभी चौपाल पर एकत्रित होने लग गए। हर कोई देश पर प्राण निछावर करने वाले शहीदों की चर्चा करने में लग गए। हालांकि शहीद श्योराम के परिवार को घटना के बारे में कोई जानकारी नही दी गई है। पूरे गांव में दिन भर चर्चा रही तो इस बात की कि श्योराम कैसा था, उसका रहन सहन उसका मिलनसार होना यह सभी बातें पूरे ग्राम वासियों को कचोट रही थी। जानकारी के अनुसार दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के पिंगलान ईलाके में रविवार रात को सीआरपीएफ के जवानों पर हमला करने के आरोपी छुपे होने की सूचना पर सेना की ओर से ऑपरेशन चलाया गया। ऑपरेशन में 55 वी राष्ट्रीय राईफल, सीआरपीएफ व एसओजी के जवान शामिल थे। इसी दौरान एक घर में छिपे आतंकियों ने ऑपरेशन कर रही टीम पर फायरिंग शुरू कर दी, जिसे टीबा के हवलदाय श्योराम सिराधना के अलावा एक मेजर व दो अन्य जवान शहीद हो गए। शहीद श्योराम सिराधना तीन भाईयों में सबसे बडे थे इनका एक भाई रूपचंद भी सेना में हिसार में तैनात है तथा तीसरा भाई रघुवीर घर पर ही रहता है। इनके पिता बालूराम की करीब 35 वर्ष पूर्व देहांत हो चुका है। घर में पत्नी सुनिता देवी व माता सारली देवी है। शहीद श्योराम के एक बच्चा कुशांक करीब चार वर्ष का है जो बसई के निजी शिक्षण संस्थान में एलकेजी में पढाई करता है। शहीद श्योराम विधानसभा चुनाव के दौरान दिसंबर में छुटटी आए थे। शहीद की पत्नी गर्भवती है तथा जल्द ही डिलीवरी होने वाली है इसी डिलीवरी होने पर श्योराम छुटटी लेकर घर आने वाले थे। ग्रामीणों ने बताया कि शहीद श्योराम सिराधना बहुत ही मिलनसार थे तथा जब भी छुटटी पर घर आते थे तो वह गांव की चौपाल पर ही अपने साथियों के साथ पुरा समय बिताते थे। सुत्रों से मिली जानकारी के अनुसार तीन-चार दिन पूर्व ही पत्नी सुनिता से फोन पर बात हुई थी जिस पर सुनिता ने अस्पताल में चैक अप करवाने की बात कही थी। इस पर शहीद श्योराम सिराधना ने कहा कि तीन-चार दिन में छुटटी लेकर आ रहा हू जिसके बाद अस्पताल में दिखाकर ले आने की बात कही थी। शहीद का पार्थिव शरीर मंगलवार को आने की संभावना है ।

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