Archive Notice: This article was originally published on 13 अप्रैल 2022.
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चूरू, भारत की आजादी आंदोलन में बलिदानों का इतिहास बड़ा गौरवशाली है। यह इतिहास मानगढ और जलियांवाला बाग के माध्यम से अंग्रेजों के क्रूरतम तथा घृणित घटनाओं से भरा पड़ा है, परंतु उन्हीं घटनाओं ने जनमानस में क्रांति का बीज बोने का काम किया। ऐसी ही घटनाओं के माध्यम से भगतसिंह एवं ऊधमसिंह जैसे नौजवान भारत के गौरवशाली इतिहास के स्वर्णिम पन्ने बन सके। जलियांवाला बाग हत्याकांड से गोरे अंग्रेजों का काला और क्रूर मन दुनिया के सामने आया तथा दुनिया ने महसूस किया कि भारत की स्वतंत्रता की मांग एक जरूरी मांग है। उक्त विचार आजादी के अमृत महोत्सव के तहत जलियांवाला बाग शहादत दिवस पर जिला प्रशासन एवं महात्मा गांधी जीवन दर्शन समिति की ओर से राजकीय मेडिकल कॉलेज में हुई संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए शिक्षाविद प्रो. एच.आर. ईसराण ने व्यक्त किए। प्रो. ईसराण ने कहा कि शांत, अहिंसक और निहत्थी भीड़ पर बर्बतरतापूर्ण गोली चलाने का ऐसे उदाहरण विश्व-इतिहास में कम ही मिलते हैं। यह जलियांवाला बाग कांड ही था कि जिसने आम भारतीय के मन में अंग्रेजों की दासता के प्रति नफरत भर दी और वे अपनी आजादी का लक्ष्य पाने की दिशा में और प्रत्यनशील हुए।

संगोष्ठी के मुख्य वक्ता सहायक लेखाधिकारी रामनिवास मीणा ने कहा कि रोलट एक्ट की पृष्ठभूमि में जब भारतीय जनता ‘नो अपील, नो वकील, नो दलील’ के बंधन से त्रस्त थी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दमनकारी कानून का प्रतिरोध करने जलियांवाला बाग में उपस्थित थी, तब इसी अभिव्यक्ति की आजादी का दमन जनरल डायर ने हजारों जानें लेकर करना चाहा। मीणा ने कहा कि उन्होंने तो ऐसा करना चाहा परंतु भारतीय जनमानस उनके दमन से और अधिक मुखर होकर प्रस्तुत हुआ जिसका परिणाम कालांतर में पूर्ण आजादी प्राप्त होना रहा। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राजकीय मेडिकल कॉलेज के डॉ. गजेंद्र सक्सैना ने कहा कि जलियांवाला बाग हत्याकांड ने भारतीय सोये हुए जनमानस को उद्वेलित किया और आजादी पाने के लक्ष्य के प्रति अग्रसर किया। कार्यक्रम में डॉ. राजेश कुमार सिंह, सुचित्रा देवलालीकर, डॉ. उत्तम कुमार, रवि सेन, डॉ. पूर्णिमा शर्मा, हीरासिंह मीणा, डॉ. राजूराम डूडी, कुलदीप बिजारणियां, हेमेंद्र, अमरचंद, आशीष, नरेंद्र सोनी, मो. जावेद, सत्यवीर सिंह, कैप्टन मदन सिंह, सुभाष जांगिड़, रौशन कुमार, वेदप्रकाश, जगदीश प्रसाद, गिरीश सोनी आदि उपस्थित रहे। महात्मा गांधी जीवन दर्शन समिति के चूरू उपखंड संयोजक रियाजत अली खान ने स्वागत किया। अहिंसा प्रकोष्ठ सहायक घनश्यामसिंह राठौड़ ने अतिथियों का माल्यार्पण किया। धन्यवाद महात्मा गांधी जीवन दर्शन समिति के जिला संयोजक डॉ. दुलाराम सहारण ने दिया। संचालन अहिंसा प्रकोष्ठ प्रभारी उम्मेद सिंह गोठवाल ने किया।

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