Archive notice This article was published on 03 June 2026 and reflects conditions at the time of publication. Information, figures, and context may have changed since.

फतेहपुर (सीकर), राजस्थान पुलिस द्वारा बालश्रम के खिलाफ चलाए जा रहे उमंग-7 अभियान के तहत फतेहपुर कस्बे में एक बड़ी कार्रवाई की गई। संयुक्त टीम ने एक ज्यूस सेंटर पर छापेमारी कर दो नाबालिग बच्चों को बालश्रम से मुक्त कराया।

मामले में ज्यूस सेंटर संचालक के खिलाफ किशोर न्याय (JJ Act) की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

सूचना के आधार पर हुई छापेमारी

क्षेत्र समन्वयक अभिषेक बगड़िया ने बताया कि ह्यूमन इंटेलिजेंस के माध्यम से सूचना मिली थी कि फतेहपुर स्थित श्री लक्ष्मीनाथ ज्यूस सेंटर पर नाबालिग बच्चों से काम करवाया जा रहा है।

सूचना के बाद राजस्थान पुलिस, जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन अलायंस, चाइल्डलाइन और गायत्री सेवा संस्थान की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की।

16 वर्षीय दो किशोर काम करते मिले

छापेमारी के दौरान सेंटर पर 16-16 वर्ष के दो किशोर काम करते हुए पाए गए।

पूछताछ में दोनों ने बताया कि उनसे प्रतिदिन 13 से 14 घंटे तक काम कराया जाता था। बदले में उन्हें इतना ही भुगतान किया जाता था जिससे वे दो वक्त का भोजन कर सकें।

“दोनों किशोरों से लंबे समय तक काम कराया जा रहा था, जो बालश्रम कानूनों का स्पष्ट उल्लंघन है।”

कस्तूरबा सेवा संस्थान में कराया दाखिल

कार्रवाई के बाद दोनों बच्चों को तत्काल बालश्रम से मुक्त कराकर सीकर स्थित कस्तूरबा सेवा संस्थान में दाखिल कराया गया।

वहां उनकी देखभाल, परामर्श और आगे की आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

दो-तीन महीने से कराया जा रहा था काम

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दोनों नाबालिगों से पिछले दो से तीन महीनों से ज्यूस सेंटर पर काम करवाया जा रहा था।

मामले में सेंटर संचालक सुरेश कुमार के खिलाफ जेजे एक्ट के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।

बालश्रम के खिलाफ जारी है उमंग-7 अभियान

राजस्थान पुलिस का उमंग-7 अभियान बालश्रम, बाल तस्करी और बच्चों के शोषण जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।

अभियान के तहत विभिन्न जिलों में लगातार निरीक्षण और बचाव अभियान संचालित किए जा रहे हैं।