Archive Notice: This article was originally published on 17 अक्टूबर 2019.
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श्रीमाधोपुर [ महेंद्र खडोलिया ] करवा चौथ का त्यौहार बड़ा ही पावन पर्व व खुशियों से भरा त्यौहार है । सुहागन अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती है। वह चाहती है हर जन्म जन्म उनका साथ मिले, उनका प्यार सदा बरसता रहे, ये आशा हर सुहागिन का सुहाग रहे सलामत हमेशा। करवा चौथ सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास है इस दिन महिलाएं दिन भर भूखी प्यासी रहकर अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती है। यही नहीं कुंवारी लड़कियां भी मन वांछित वर के लिए या होने वाले पति की खातिर निर्जला व्रत रखती है। इस दिन पूरे विधि-विधान से माता पार्वती और भगवान श्री गणेश की पूजा अर्चना करने के बाद करवा चौथ की कथा सुनती है फिर रात के समय चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही यह व्रत संपन्न होता है । मान्यता है कि करवा चौथ का व्रत करने से अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है। यह औरत के अच्छे गृहस्थ जीवन के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन करवा चौथ के दिन सोलह सिंगार का विशेष महत्व होता है। करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को रखा जाता है। यह व्रत सुहागन औरतें अपने पति की लंबी आयु की कामना करने के लिए रखती है खास बात यह है कि करवा चौथ पर इस बार करीब 70 वर्ष बाद बेहद शुभ संयोग बन रहा है। ढाणी वासी संतोष देवी, ग्यारसी देवी, मंजू देवी आदि ने बताया कि करवा चौथ के दिन पूरे दिन पत्नी पति के लिए उपवास रखती है। उन्होंने बताया कि सुबह से अपनी तैयारियों में लग जाती है व सुबह चौथ माता की कहानी सुनने के बाद मंदिरों आदि में जाती हैं।

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