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Video: झुंझुनू जमीनी विवाद : बेटियों ने अपने हक़ के लिए खटखटाया कलेक्टर का द्वार

दत्तक भाई पर धोखधड़ी से जमीन हड़पने का आरोप, विधायक पुत्र पर भी जड़ा आरोप

झुंझुनूं जिले में जमीनी विवाद को लेकर एक गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। महरमपुर गांव की रहने वाली बहनों ने झुंझुनूं जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपने हक और न्याय की गुहार लगाई। बेटियों का आरोप है कि उनके दत्तक भाई ने धोखाधड़ी से पैतृक जमीन अपने नाम करवा ली, जबकि छोटी बेटी वर्षों से उसी जमीन पर निवास कर रही हैं।

“20 साल से पिता के घर में रह रही हूं”

परिवादिया सुधीरा, जो छह बहनों में सबसे छोटी हैं, ने मीडिया को बताया कि

“मैं पिछले 20 वर्षों से अपने पिता के घर में रह रही हूं। मेरे बच्चे यहीं पले-बढ़े हैं और मेरे सभी दस्तावेज इसी पते से बने हुए हैं।”

उनका आरोप है कि पिता के जीवित रहते ही उनके दत्तक भाई ने धोखे से कागजों पर हस्ताक्षर करवा कर जमीन अपने नाम करवा ली, जबकि पिता की देखभाल भी उन्होंने ही की थी।

बहनों के साइन नहीं, फिर भी नामांतरण

परिवादिया का कहना है कि

  • किसी भी बहन के हस्ताक्षर नहीं लिए गए
  • उन्हें इस प्रक्रिया की कोई जानकारी नहीं दी गई

इसके बावजूद जमीन उनके दत्तक भाई के नाम दर्ज कर दी गई।

स्थगन आदेश के बावजूद कुर्की का आरोप

बेटियों का यह भी आरोप है कि

  • उपखंड अधिकारी, चिड़ावा द्वारा भूमि पर स्थगन आदेश जारी किया गया था
  • इसके बावजूद जमीन की कुर्की कर दी गई

जबकि उक्त भूमि पर उनका परिवार वर्तमान में रिहायश कर रहा है।

पुलिस पर धमकाने के आरोप

परिवादिया सुधीरा ने आरोप लगाया कि

  • पुलिस द्वारा उन्हें धमकियां दी जा रही हैं
  • शिकायत के बावजूद पुलिस में उनकी सुनवाई नहीं हो रही

उनका कहना है कि उल्टा पीड़ित परिवार को ही डराया जा रहा है।

विधायक पुत्र पर भी गंभीर आरोप

इस पूरे मामले में बेटियों ने विधायक भाम्बू के पुत्र सचिन पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं।
परिवादिया के अनुसार

सचिन इस पूरे मामले में साझेदार है और उसी की शह पर हमारी जमीन हड़पने का प्रयास किया जा रहा है।

ग्रामीणों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंची बेटियां

इस मामले को लेकर बड़ी संख्या में ग्रामीणजन और महिलाएं भी बेटियों के समर्थन में कलेक्ट्रेट पहुंचे। सभी ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की।

प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग

ग्रामीणों और बेटियों का कहना है कि जब आज के समय में बेटा-बेटी में समानता की बात की जाती है, तब बेटियों को अपने हक के लिए प्रशासनिक दरवाजे खटखटाने पड़ रहे हैं, यह बेहद चिंताजनक है।

यह आरोप जांच का विषय

यह स्पष्ट किया जाता है कि
उपरोक्त सभी आरोप परिवादिया पक्ष द्वारा लगाए गए हैं
मामले की निष्पक्ष जांच प्रशासन द्वारा की जानी शेष है
Shekhawati Live इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता