कांग्रेस का आरोप मनरेगा को खत्म करने की तैयारी
झुंझुनूं। कांग्रेस पार्टी ने मनरेगा बचाओ संग्राम–जनआंदोलन का औपचारिक आगाज करते हुए सरकार पर मनरेगा को कमजोर और समाप्त करने की साजिश का आरोप लगाया है। आंदोलन की शुरुआत झुंझुनूं सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता के साथ की गई।
प्रेस वार्ता को
- मंडावा विधायक व जिला कांग्रेस अध्यक्ष रीटा चौधरी,
- जिला कांग्रेस प्रभारी राम सिंह कस्वा,
- पूर्व मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह
ने संबोधित किया।
“100 दिन का हक सिर्फ कागजों में” – राम सिंह कस्वा
जिला कांग्रेस प्रभारी राम सिंह कस्वा ने कहा
“सरकार मनरेगा को खत्म करने का प्रयास कर रही है।
देश में जब कानूनन 100 दिन काम देने का प्रावधान है,
तब मजदूरों को औसतन सिर्फ 55 दिन का ही काम मिल पा रहा है।”
उन्होंने तंज कसते हुए कहा
“सवा सौ दिन का काम देने की बातें केवल भ्रम फैलाने के लिए हैं।
राम के नाम पर राजनीति करने वाले लोग
राम के सबसे प्रिय गरीब व्यक्ति के साथ न्याय नहीं कर रहे।”
मीडिया और लोकतंत्र पर भी सवाल
पूर्व मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मनरेगा के साथ-साथ
मीडिया की स्थिति पर भी सरकार को घेरा।
उन्होंने इशारों में कहा
“हमारी सरकार में पत्रकारों की मजबूती के लिए काम किया गया।
आज पत्रकारों की स्थिति क्या है,
सरकार का व्यवहार कैसा है,
यह किसी से छुपा नहीं है।”
तकनीकी बदलाव से योजना कमजोर” – रीटा चौधरी
जिला कांग्रेस अध्यक्ष रीटा चौधरी ने कहा
“सरकार ने तकनीकी रूप से मनरेगा कानून को कमजोर किया है।”
उन्होंने बताया:
- पहले 90% राशि केंद्र और 10% राज्य देता था
- अब इसे 60:40 कर दिया गया है
- राज्यों के पास 40% हिस्सा देने की क्षमता नहीं है
इसका सीधा असर यह होगा कि
काम नहीं मिलेगा और योजना ठप हो जाएगी।
पंचायतों के अधिकार छीने जा रहे
रीटा चौधरी ने कहा
“अब दिल्ली में एसी कमरों में बैठे अधिकारी तय करेंगे
कि कहां काम होगा और कहां नहीं,
जबकि यह निर्णय स्थानीय ग्राम पंचायतों का अधिकार है।”
उन्होंने इसे लीपापोती बताते हुए कहा
“यह योजना को धीरे-धीरे खत्म करने की तैयारी है।”
31 जनवरी से 6 फरवरी 2026 तक आंदोलन
कांग्रेस ने ऐलान किया कि—
31 जनवरी से 6 फरवरी 2026 तक
झुंझुनूं जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा
आंदोलन का समापन:
- VB-GRAM-G विधेयक वापस लेने
- मनरेगा को मूल स्वरूप में बनाए रखने
की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपकर किया जाएगा।
इस दौरान लगातार कांग्रेस के कार्यक्रम चलते रहेंगे।