सीकर जिले में फिरौती मांगने के गंभीर मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो अपराधियों को गिरफ्तार किया है। मामला 17 नवंबर 2025 को सामने आया, जब सेवद बड़ी निवासी एक व्यवसायी ने रिपोर्ट दी कि 15 और 16 नवंबर को रोहित गोदारा और नवीन बॉक्सर ने उसके व्हाट्सऐप नंबर पर वॉइस रिकॉर्डिंग भेजकर फिरौती मांगी और रकम न देने पर जान से मारने की धमकी दी। रिपोर्ट दर्ज होते ही पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत दबिशें शुरू कर दीं।
पुलिस की जांच-जेल से रिहा अपराधियों की लिस्ट खंगाली
थानाधिकारी ने उच्चाधिकारियों के निर्देश पर टीमों का गठन किया और सीकर, बीकानेर व चूरू जेल से पिछले दो वर्षों में जमानत पर रिहा होने वाले अपराधियों की जानकारी जुटानी शुरू की। इसी दौरान एक नाम सामने आया-सुरेंद्र बांगड़वा, जो 2022 में खुली जेल सीकर से आजीवन कारावास की सजा पूरी कर रिहा हुआ था।
जांच में सामने आया कि सुरेंद्र पहले परिवादी के पास ट्रक ड्राइवर के रूप में काम कर चुका है। पुलिस ने उस पर गुप्त निगरानी बढ़ाई और उसके पुराने क्राइम रिकॉर्ड, संपर्कों और गतिविधियों की विस्तृत पड़ताल की।
सुरेंद्र बांगड़वा-हत्या में आजीवन कारावास भुगत चुका अपराधी
जांच में पता चला कि सुरेंद्र सालासर थाना क्षेत्र में वर्ष 2009 में एक हत्या के मामले में गिरफ्तार हुआ था और रतनगढ़, चूरू, बीकानेर, जयपुर सहित कई जेलों में रहा था। जेल में रहते हुए उसकी मुलाकात कुख्यात अपराधी नवीन बॉक्सर से हुई। रिहाई के बाद दोनों सोशल प्लेटफॉर्म और एक विशेष मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से लगातार संपर्क में रहे।
अपराधियों का नेटवर्क-युवाओं को जोड़कर बना रखा था गैंग
नवीन बॉक्सर ने सुरेंद्र को अपने गैंग में 4-5 लड़कों को जोड़ने के लिए कहा, जिसके बाद सुरेंद्र ने अपने रिश्तेदार के दोस्त हेमंत शर्मा को इस गिरोह से जोड़ दिया। दोनों के मोबाइल में वही विशेष एप डाउनलोड करवाई गई, जिसके जरिए वे पिछले दो वर्षों से नवीन बॉक्सर के टच में थे।
विवाद ने दिया अपराध को जन्म
सुरेंद्र बांगड़वा का अपने ट्रक मालिक से पैसों को लेकर विवाद हो गया था। इसी दौरान उसने व्यवसायी की जानकारी नवीन बॉक्सर तक पहुंचाकर उसे फिरौती के संभावित टारगेट के रूप में बताने की योजना बनाई।
सुरेंद्र ने लगभग 8 महीने तक व्यवसायी के यहां ट्रक ड्राइवर के रूप में काम किया और उसके परिवार, बिजनेस और वित्तीय स्थिति की पूरी जानकारी जुटा ली।
अक्टूबर 2025 में उसने ड्राइवरी छोड़ दी, लेकिन 8 नवंबर को जब व्यवसायी ने दोबारा ड्राइवर की जरूरत बताई तो वह योजना के अनुसार फिर काम पर जुड़ गया, ताकि व्यवसायी को शक न हो।
पूरी साजिश का भंडाफोड़
जांच में सुरेंद्र और हेमंत पर शक गहराया। पुलिस ने गुप्त सूचनाओं और तकनीकी जांच के आधार पर पहले सुरेंद्र को दबोचा और फिर उसकी निशानदेही पर हेमंत शर्मा को भी गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में दोनों ने स्वीकार किया कि उन्होंने नवीन बॉक्सर की मदद से व्यवसायी को फिरौती के लिए धमकी दिलवाई थी।
गिरोह का नेटवर्क उजागर
पूछताछ में यह भी सामने आया कि –
- सुरेंद्र और नवीन बॉक्सर के बीच लंबे समय से संबंध थे
- दोनों एक विशेष मोबाइल ऐप के जरिए संपर्क में रहते थे
- जेल से रिहा होने के बाद भी गिरोह सक्रिय रूप से काम कर रहा था
- व्यवसायी की सारी जानकारी गैंग को पहले से दी जा चुकी थी
सीकर पुलिस की त्वरित और रणनीतिक कार्रवाई से एक बड़े फिरौती गिरोह का पर्दाफाश हो गया है।