उदयपुरवाटी ,कैलाश बबेरवाल नगर पालिका परिसर में संचालित शहरी सेवा शिविर की व्यवस्थाओं को लेकर स्थानीय लोगों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। लोगों का आरोप है कि शिविर के दौरान कई अधिकारी और कर्मचारी निर्धारित समय से पहले ही अपनी सीट छोड़ देते हैं, जिससे आमजन के कार्य समय पर नहीं हो पा रहे हैं। इसी बीच हल्का के एक पटवारी का कथित रूप से रिश्वत मांगने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने का दावा भी चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, इस वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। यह दावा सोशल मिडिया पर वायरल एक वीडियो में किया जा रहा है। जिसकी शेखावाटी लाइव पुष्टि नहीं करता है।
शिविर में अधिकारियों की अनुपस्थिति का आरोप
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सरकार की ओर से प्रतिदिन आयोजित किए जा रहे शहरी सेवा शिविर का उद्देश्य लोगों के कार्यों का मौके पर ही निस्तारण करना है, लेकिन कई बार संबंधित विभागों के अधिकारी या कर्मचारी अपनी सीट पर नहीं मिलते।
लोगों का आरोप है कि उन्हें भीषण गर्मी में नगर पालिका के कई चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, बावजूद इसके उनके काम लंबित बने हुए हैं।
“लाखों खर्च, लेकिन लोगों को नहीं मिल रहा लाभ”
शिविर में पहुंचे लोगों का कहना है कि सरकार इन शिविरों के आयोजन पर लाखों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन धरातल पर आमजन को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा। उनका कहना है कि यदि अधिकारी निर्धारित समय तक उपस्थित रहें तो अधिकांश मामलों का मौके पर ही समाधान संभव है।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से शिविरों की नियमित मॉनिटरिंग करने और अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने की मांग की है।
पटवारी का कथित रिश्वत वीडियो भी चर्चा में
इधर, उदयपुरवाटी क्षेत्र के हल्का के एक पटवारी का कथित रूप से काम के बदले रिश्वत मांगने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने का दावा किया जा रहा है।
हालांकि, इस वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और न ही संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि की गई है। मामला जांच का विषय है। स्थानीय लोगों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासन से उठी कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों और स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि शहरी सेवा शिविरों की नियमित निगरानी की जाए, अधिकारियों-कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित की जाए और यदि रिश्वतखोरी के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।





