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RGHS घोटाला: कोर्ट ने पुलिस जांच पर उठाए सवाल, 13 पर वारंट

CJM court action in RGHS scam case Churu Rajasthan

RGHS घोटाले में बड़ा न्यायिक घटनाक्रम

चूरू में राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी RGHS योजना से जुड़े
लाखों रुपये के कथित घोटाले में बड़ा न्यायिक मोड़ आया है।
चूरू CJM कोर्ट ने कोतवाली थाना द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट पर
कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस अनुसंधान को संदिग्ध और दूषित माना है।

13 आरोपियों पर गिरफ्तारी वारंट

कोर्ट ने मामले में
आयुर्वेदिक डॉक्टरों, मेडिकल स्टोर संचालकों, कंप्यूटर ऑपरेटर
और RGHS लाभार्थियों सहित कुल 13 व्यक्तियों के खिलाफ प्रसंज्ञान लेते हुए
गिरफ्तारी वारंट से तलब करने के आदेश दिए हैं।

अगस्त 2025 में दर्ज हुआ था मामला

यह प्रकरण अगस्त 2025 में
तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. मनोज कुमार शर्मा की रिपोर्ट पर
कोतवाली थाने में दर्ज किया गया था।
हालांकि पुलिस जांच में
केवल एक कंप्यूटर ऑपरेटर की गिरफ्तारी की गई,
जबकि अन्य संदिग्धों को गवाह बना दिया गया

फर्जी पर्चियों से लाखों का भुगतान

आरोप है कि

  • सरकारी आयुर्वेदिक अस्पताल की पर्चियां
    अस्पताल के बाहर स्थित मेडिकल स्टोर पर उपयोग की गईं
  • RGHS कार्डधारकों से OTP लेकर फर्जी पर्चियां तैयार की गईं
  • योजना के तहत लाखों रुपये का भुगतान उठाया गया

जांच में यह भी सामने आया कि
कई रोगियों के नाम OPD रजिस्टर में दर्ज ही नहीं थे

डॉक्टरों की सील और नाम का दुरुपयोग

रिकॉर्ड के अनुसार

  • छुट्टी पर मौजूद डॉक्टरों के नाम और सील का उपयोग किया गया
  • शिवम आयुर्वेदिक ड्रग्स द्वारा RGHS में
    करीब 77.34 लाख रुपये की बिक्री दर्शाई गई

इनमें

  • 47.84 लाख रुपये केवल डॉ. पवन जांगिड़ की पर्चियों से जुड़े पाए गए
  • डॉ. कविता धनकड़ की पर्चियों से भी लाखों की बिक्री सामने आई

एक ही लाभार्थी द्वारा
53 बार विजिट कर 2.26 लाख रुपये की दवाएं लेने का तथ्य भी उजागर हुआ,
जिससे लाभार्थियों की मिलीभगत की आशंका प्रबल हुई।

कोर्ट की कड़ी टिप्पणी, DGP को निर्देश

CJM कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह प्रकरण

  • धोखाधड़ी
  • कूटरचित दस्तावेज
  • राजकोष की राशि के गबन
  • आपराधिक षड्यंत्र

से जुड़ा है।
कोर्ट ने अनुसंधान अधिकारी की भूमिका को संदिग्ध बताते हुए
राजस्थान के DGP को अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं।

गंभीर धाराओं में मामला दर्ज

कोर्ट ने सभी अभियुक्तों के खिलाफ
भारतीय न्याय संहिता 2023 की गंभीर धाराओं में प्रसंज्ञान लेते हुए
मामले को फौजदारी मूल के रूप में दर्ज किया है।

अगली सुनवाई: 30 जनवरी 2026