चूरू, प्लास्टिक मुक्त राजस्थान की दिशा में राज्य सरकार ने एक और ठोस कदम बढ़ाया है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में शुरू की गई बर्तन बैंक योजना के तहत चूरू जिले की 21 ग्राम पंचायतों में बर्तन बैंक स्थापित किए गए हैं।
इस योजना का उद्देश्य एकल-उपयोग प्लास्टिक को कम कर पर्यावरण संरक्षण और पारंपरिक संस्कृति को बढ़ावा देना है।
प्लास्टिक से बढ़ती पर्यावरणीय चुनौती
आज के समय में विवाह, भोज, मेलों और सामूहिक आयोजनों में बड़ी मात्रा में
प्लास्टिक प्लेट, गिलास और चम्मच का उपयोग किया जा रहा है, जो
पर्यावरण प्रदूषण
मानव स्वास्थ्य
पशु जीवन
के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए राज्य सरकार ने बजट 2025-26 में बर्तन बैंक योजना की घोषणा की।
पहले चरण में 1000 पंचायतों को मिला लाभ
राज्य सरकार द्वारा प्रथम चरण में प्रदेश की 1000 ग्राम पंचायतों को
₹1 लाख मूल्य के स्टील बर्तन
उपलब्ध करवाए गए हैं।
चूरू जिले में प्रत्येक ब्लॉक से 3-3 पंचायतों का चयन कर 21 पंचायतों में बर्तन बैंक स्थापित किए गए हैं।
चूरू जिले की ये पंचायतें शामिल
तारानगर ब्लॉक: बूचावास, सात्यूं, राजपुरा
सरदारशहर ब्लॉक: मेहरासर उपाधियान, बुकनसर बड़ा, उड़सर लोडेरा
सुजानगढ़ ब्लॉक: जैतासर, सालासर, गोपालपुरा
चूरू ब्लॉक: आसलखेड़ी, सिरसला, घांघू
बीदासर ब्लॉक: चाड़वास, लालगढ़, सांडवा
रतनगढ़ ब्लॉक: पड़िहारा, गोगासर, लाछड़सर
राजगढ़ ब्लॉक: कालरी, ददरेवा, सिद्धमुख
ऐसे काम करेगा बर्तन बैंक
प्रत्येक ग्राम पंचायत में स्थापित बर्तन बैंक में
कम से कम 400 स्टील बर्तन सेट उपलब्ध होंगे।
एक सेट में शामिल बर्तन:
- 1 प्लेट
- 3 कटोरी
- 1 चम्मच
- 1 गिलास
(कुल 6 बर्तन)
सभी बर्तनों पर
“ग्राम पंचायत बर्तन बैंक – स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण)”
की स्पष्ट मार्किंग की गई है। बर्तनों के रखरखाव हेतु विशेष रैक व्यवस्था भी की गई है।
जनभागीदारी से स्वच्छता सुनिश्चित
ग्रामीण क्षेत्रों में
सरकारी बैठकों, सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में
अब डिस्पोजल के बजाय स्टील बर्तनों का उपयोग किया जाएगा।
इससे
प्लास्टिक कचरा कम होगा
स्वच्छता बढ़ेगी
पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी
प्रशासन का संदेश
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि
“बर्तन बैंक योजना जनभागीदारी से सफल होगी और आने वाले समय में गांवों को वास्तव में प्लास्टिक मुक्त बनाएगी।”