यूनाइटेड किंगडम के बर्मिंघम में 12 वर्षीय जोशुआ थॉमस की मौत के मामले में अदालत ने उसके माता-पिता को जेल की सजा सुनाई है। अदालत के अनुसार बच्चे में गंभीर बीमारी के स्पष्ट लक्षण दिखाई देने के बावजूद समय पर मेडिकल सहायता नहीं ली गई, जिसके कारण उसकी मौत हो गई।
यह घटना 9 दिसंबर 2022 की है, जब जोशुआ अपने घर पर गंभीर रूप से बीमार हो गया था। बाद में अस्पताल में उसकी मौत हो गई।
टाइप-1 डायबिटीज और DKA बना मौत का कारण
अदालती सुनवाई के दौरान बताया गया कि जोशुआ टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित था, जिसकी पहचान समय पर नहीं हो सकी। इलाज नहीं मिलने के कारण उसे डायबिटिक कीटोएसिडोसिस (DKA) हो गया।
DKA एक गंभीर और जानलेवा चिकित्सकीय स्थिति है, जिसमें शरीर में इंसुलिन की कमी के कारण खून में खतरनाक स्तर तक कीटोन्स बढ़ जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार समय पर इलाज मिलने पर इस स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है।
कई दिनों से दिख रहे थे गंभीर लक्षण
कोर्ट में पेश साक्ष्यों के अनुसार जोशुआ कई दिनों से अस्वस्थ था। मौत से पहले उसके अंदर अत्यधिक प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना और तेजी से वजन कम होना जैसे लक्षण दिखाई दे रहे थे।
9 दिसंबर की सुबह उसकी हालत इतनी खराब हो गई थी कि वह बिना सहारे के बाथरूम तक नहीं जा पा रहा था। इसके बावजूद तत्काल एम्बुलेंस नहीं बुलाई गई और न ही उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया।
अदालत ने कहा- यह मौत रोकी जा सकती थी
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने कहा कि यह मौत पूरी तरह रोकी जा सकती थी। अदालत का मानना था कि जब बच्चे की स्थिति स्पष्ट रूप से आपातकालीन हो चुकी थी, तब तत्काल चिकित्सा सहायता लेना आवश्यक था।
कोर्ट ने कहा कि यदि समय रहते इमरजेंसी मेडिकल मदद ली जाती, तो जोशुआ के बचने की संभावना थी।
चिकित्सा लापरवाही पर सख्त संदेश
इस फैसले को चिकित्सा आपात स्थिति में समय पर इलाज की आवश्यकता और अभिभावकों की जिम्मेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि टाइप-1 डायबिटीज के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और गंभीर स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
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