चिड़ावा,मनीष शर्मा। फादर्स डे के दिन चिड़ावा में एक ऐसा भावुक और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला जिसने वहां मौजूद लोगों का दिल छू लिया। NEET परीक्षा देने पहुंची एक छात्रा का भविष्य उस समय संकट में पड़ गया जब वह अपना ओरिजनल आधार कार्ड घर पर ही भूल गई। लेकिन पिता की सूझबूझ और संघर्ष ने बेटी के सपनों को टूटने नहीं दिया।

परीक्षा केंद्र पहुंचते ही सामने आई बड़ी परेशानी

चिड़ावा के वार्ड नंबर 25 निवासी दीक्षा अपने माता-पिता के साथ महात्मा गांधी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय स्थित परीक्षा केंद्र पर समय से पहले पहुंच गई थी।

परीक्षा शुरू होने से पहले सब कुछ सामान्य था। माता-पिता बेटी का हौसला बढ़ा रहे थे और परीक्षा से जुड़ी जरूरी बातें समझा रहे थे।

लेकिन जैसे ही दीक्षा परीक्षा केंद्र में प्रवेश करने लगी, तब पता चला कि वह अपना मूल आधार कार्ड घर पर ही भूल गई है।

आंखों में आंसू, सामने दिखने लगा सपना टूटने का डर

आधार कार्ड नहीं होने की जानकारी मिलते ही दीक्षा घबरा गई और उसकी आंखों से आंसू निकलने लगे।

परिवार के सामने सबसे बड़ी समस्या यह थी कि घर परीक्षा केंद्र से काफी दूर था और उनके पास तत्काल कोई वाहन भी उपलब्ध नहीं था।

दीक्षा को लगने लगा कि उसकी दो वर्षों की मेहनत बेकार हो सकती है।

पिता ने नहीं मानी हार

विपरीत परिस्थितियों में भी पिता सतीश कुमार ने हिम्मत नहीं हारी।

आसपास मौजूद लोगों ने भी सहयोग किया और एक सज्जन अपनी मोटरसाइकिल पर सतीश कुमार को लेकर नजदीकी ई-मित्र केंद्र पहुंचे।

वहां से जरूरी प्रक्रिया पूरी कर नया आधार कार्ड प्राप्त किया गया।

मात्र कुछ सेकेंड पहले पहुंचे परीक्षा केंद्र

समय तेजी से निकल रहा था, लेकिन पिता लगातार प्रयास करते रहे।

आखिरकार सतीश कुमार परीक्षा केंद्र का प्रवेश द्वार बंद होने से महज दो-तीन सेकेंड पहले वापस पहुंच गए और दीक्षा को आवश्यक दस्तावेज मिल गए।

इसके बाद उसे परीक्षा केंद्र में प्रवेश मिल गया और वह परीक्षा दे सकी।

मौजूद लोगों ने की पिता की सराहना

पूरी घटना को देखकर परीक्षा केंद्र पर मौजूद अभिभावक, अधिकारी और कर्मचारी भी भावुक हो गए।

एक पिता की अपनी बेटी के भविष्य के लिए की गई इस भागदौड़ और समर्पण की हर किसी ने सराहना की।

दीक्षा बोली— यह फादर्स डे का सबसे बड़ा उपहार

परीक्षा देकर बाहर आने के बाद दीक्षा ने अपने पिता के प्रति आभार व्यक्त किया।

उसने कहा

“अगर पापा ने आज इतनी मेहनत नहीं की होती तो मेरी दो साल की तैयारी और मेहनत पर पानी फिर जाता। मेरे लिए फादर्स डे का इससे बड़ा उपहार कोई नहीं हो सकता।”

पिता-पुत्री के रिश्ते की बनी मिसाल

यह घटना सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि पिता-पुत्री के अटूट विश्वास, समर्पण और संघर्ष की मिसाल बन गई।

फादर्स डे पर यह कहानी हर उस पिता को समर्पित है जो अपने बच्चों के सपनों को पूरा करने के लिए हर मुश्किल से लड़ जाता है।

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