झुंझुनूं। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, झुंझुनूं ने एक महत्वपूर्ण बीमा दावा प्रकरण का आपसी समझौते (राजीनामे) के आधार पर निस्तारण करते हुए बीमा कंपनी को परिवादी को 7 लाख 50 हजार रुपये का मुआवजा एक माह के भीतर देने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने यह निर्णय दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते को स्वीकार करते हुए पारित किया।
आयोग के अध्यक्ष मनोज कुमार मील एवं सदस्य प्रमेन्द्र कुमार सैनी के समक्ष परिवादी अनिल कुमार सांसी और श्रीराम इंश्योरेंस कंपनी, जयपुर की ओर से संयुक्त रूप से राजीनामा प्रस्तुत किया गया। आयोग ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम और लोक अदालत की भावना के अनुरूप समझौते को स्वीकार करते हुए मामले का अंतिम निस्तारण कर दिया।
सड़क हादसे में गंवाना पड़ा था पैर
प्रकरण के अनुसार, अनिल कुमार सांसी जयपुर में ई-रिक्शा चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। एक सड़क दुर्घटना में उसका दाहिना पैर गंभीर रूप से घायल हो गया। जयपुर के एक निजी अस्पताल में ऑपरेशन के बावजूद स्थिति बिगड़ने पर चिकित्सकों को उसका दाहिना पैर घुटने के ऊपर से काटना पड़ा।
इसके बाद अनिल कुमार ने अपने पिता सवाई सिंह मालावत के माध्यम से मई 2024 में जिला उपभोक्ता आयोग, झुंझुनूं में क्षतिपूर्ति का दावा दायर किया था।
ई-रिक्शा क्षति के लिए भी मिला अलग मुआवजा
मुख्य मुआवजे के अलावा आयोग ने सड़क दुर्घटना में क्षतिग्रस्त ई-रिक्शा के बीमा दावे पर भी फैसला सुनाया। आयोग ने श्रीराम जनरल इंश्योरेंस कंपनी को 48 हजार रुपये की राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित डेढ़ माह के भीतर भुगतान करने के आदेश दिए हैं।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया जाता है, तो बीमा कंपनी को यह राशि 12.50 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ अदा करनी होगी।
आयोग ने माना विवाद पूरी तरह समाप्त
परिवादी के पिता सवाई सिंह मालावत ने आयोग के निर्णय पर संतोष जताते हुए कहा कि यह मुआवजा उनके पुत्र के पुनर्वास और भविष्य को संवारने में सहायक होगा।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि दोनों पक्षों के बीच अब कोई विवाद शेष नहीं है। राजीनामे को स्वीकार करते हुए संबंधित वाद का अंतिम निस्तारण कर उसे बंद करने के निर्देश दिए गए।






