झुंझुनूं। श्री जेजेटी विश्वविद्यालय के विधि संस्थान एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) ने एसआरएसएस लॉ कॉलेज, मुंबई के सहयोग से “डिजिटल युग में कानून का भविष्य : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सुरक्षा एवं डेटा गवर्नेंस में चुनौतियां एवं अवसर” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया। सम्मेलन में देशभर के विधि विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, अधिवक्ताओं, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने भाग लेकर डिजिटल दौर में कानून की बदलती चुनौतियों और संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।
एआई और डिजिटल तकनीकों के अनुरूप कानून विकसित करने पर जोर
कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के चेयरपर्सन डॉ. विनोद टिबड़ेवाला, प्रेसिडेंट प्रो. मधु गुप्ता, एसआरएसएस लॉ कॉलेज की निदेशक डॉ. वी.एस. वालेचा, रजिस्ट्रार डॉ. अजीत कुमार तथा मुख्य वित्त अधिकारी डॉ. अमन गुप्ता के संरक्षण एवं मार्गदर्शन में किया गया।
अपने संदेश में प्रो. मधु गुप्ता ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल तकनीकों के तेजी से बढ़ते प्रभाव को देखते हुए विधि शिक्षा, अनुसंधान और न्याय व्यवस्था को समय की जरूरतों के अनुरूप विकसित करना आवश्यक है।
विशेषज्ञों ने साइबर कानून और डेटा सुरक्षा पर रखे विचार
विधि संस्थान के डीन एवं सम्मेलन अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार ने स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत किया, जबकि सम्मेलन संयोजक डॉ. धर्मेन्द्र कौशिक ने कार्यक्रम की विषय-वस्तु और उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।
सम्मेलन के मुख्य वक्ताओं में डॉ. एस.के. सैनी (राजकीय विधि महाविद्यालय, चूरू), डॉ. अंजू गहलोत (यूनिवर्सिटी लॉ कॉलेज, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर) तथा डॉ. अखिल कुमार (पूर्व निदेशक, यूनिवर्सिटी लॉ कॉलेज, राजस्थान विश्वविद्यालय) शामिल रहे।
विशेषज्ञों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, डेटा संरक्षण, डिजिटल गोपनीयता, साइबर अपराध और डेटा गवर्नेंस से जुड़े समकालीन कानूनी विषयों पर विस्तार से अपने विचार रखे तथा बदलते तकनीकी परिवेश के अनुरूप विधिक ढांचे को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
शोध-पत्र प्रस्तुत, प्रतिभागियों ने किया संवाद
सम्मेलन के दौरान विभिन्न शोधार्थियों और प्रतिभागियों ने अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए तथा समकालीन विधिक विषयों पर सार्थक चर्चा की। कार्यक्रम के सफल संचालन में सम्मेलन समन्वयक डॉ. नाज़िया हुसैन की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
इस अवसर पर डॉ. यूसुफ अली, डॉ. रामनिवास सोनी, डॉ. शिव कुमार सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के समापन पर सम्मेलन संयोजक डॉ. धर्मेन्द्र कौशिक ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिभागियों और सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त किया।





