राजस्थान सरकार ने राजस्थान विधिक माप विज्ञान (प्रवर्तन) नियम, 2011 में महत्वपूर्ण संशोधन प्रस्तावित किए हैं। इन संशोधनों का उद्देश्य व्यवसाय सुगमता को बढ़ावा देना, अनुपालन संबंधी बोझ को कम करना तथा नियामकीय प्रक्रियाओं को अधिक सरल और पारदर्शी बनाना है।
झुंझुनूं में जारी जानकारी के अनुसार यह पहल भारत सरकार की डी-रेगुलेशन एवं कम्प्लायंस बर्डन रिडक्शन नीति तथा जन विश्वास अधिनियम-2026 के प्रावधानों के अनुरूप की जा रही है।
लाइसेंस की जगह स्व-घोषणा आधारित पंजीकरण का प्रस्ताव
प्रस्तावित संशोधनों में निर्माताओं, मरम्मतकर्ताओं और विक्रेताओं के लिए वर्तमान लाइसेंस प्रणाली के स्थान पर स्व-घोषणा आधारित पंजीकरण प्रमाण-पत्र व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है।
इसके साथ ही लाइसेंस नवीनीकरण की अनिवार्यता समाप्त करने का भी प्रावधान शामिल किया गया है, जिससे व्यापारियों और उद्यमियों को राहत मिल सकेगी।
सत्यापन प्रक्रिया में होंगे महत्वपूर्ण बदलाव
प्रस्तावित नियमों में सरकारी अनुमोदित परीक्षण केंद्रों (GATCs) को सत्यापन एवं मुद्रांकन प्रक्रिया में शामिल करने का सुझाव भी दिया गया है।
इसके अलावा सत्यापन शुल्क के युक्तिसंगत पुनर्निर्धारण तथा विभिन्न श्रेणी के उल्लंघनकर्ताओं के लिए अनुपातिक शमन शुल्क तय करने जैसे प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।
आमजन और उद्योग जगत से मांगे सुझाव
राज्य सरकार ने इन प्रस्तावित संशोधनों पर व्यापारिक संगठनों, उद्योग संघों, उपभोक्ता संगठनों और आम नागरिकों से सुझाव एवं आपत्तियां आमंत्रित की हैं।
इच्छुक व्यक्ति या संस्थाएं राजस्थान राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से सात दिनों के भीतर अपने सुझाव या आपत्तियां भेज सकते हैं।
ई-मेल के जरिए भेज सकते हैं सुझाव
सुझाव और आपत्तियां निम्न ई-मेल आईडी पर भेजी जा सकती हैं:
सरकार ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा के बाद प्राप्त सुझावों और आपत्तियों पर विचार नहीं किया जाएगा।





