नई दिल्ली। ग्रामीण भारत में अब हर सड़क की अलग पहचान होगी। केंद्र सरकार गांवों की अंदरूनी सड़कों को नाम, यूनिक रोड कोड और DigiPIN देने की तैयारी कर रही है। मिली जानकारी के अनुसार पंचायती राज मंत्रालय की इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में नेविगेशन आसान बनाना, सरकारी सेवाओं की डिलीवरी बेहतर करना और डिजिटल एड्रेस सिस्टम को मजबूत करना है।
क्यों जरूरी है यह व्यवस्था?
देश के लाखों गांवों में आज भी अंदरूनी सड़कों के स्पष्ट नाम या पते नहीं हैं। ऐसे में ई-कॉमर्स डिलीवरी, एंबुलेंस, डाक सेवा, पुलिस, अग्निशमन और अन्य आपातकालीन सेवाओं को सही स्थान तक पहुंचने में परेशानी होती है।
कई ग्रामीण सड़कें प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के आधिकारिक नेटवर्क में भी दर्ज नहीं हैं, जिससे योजना निर्माण और निगरानी में भी कठिनाई आती है।
हर सड़क को मिलेगा यूनिक कोड और DigiPIN
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत प्रत्येक ग्रामीण सड़क को एक यूनिक रोड कोड और DigiPIN दिया जाएगा। DigiPIN, डाक विभाग द्वारा विकसित जियो-स्पेशल पहचान प्रणाली है, जो किसी स्थान की सटीक डिजिटल लोकेशन उपलब्ध कराती है।
सड़कों को ग्राम मानचित्र, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) और स्थानीय प्रशासनिक डेटाबेस से जोड़ा जाएगा, जिससे एकीकृत डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा।
कैसे होगा वर्गीकरण?
नई व्यवस्था में सड़कों को उनके उपयोग और कनेक्टिविटी के आधार पर वर्गीकृत किया जाएगा। इनमें शामिल होंगे—
- अन्य जिला सड़क (ODR)
- गांव की सड़क (VR)
- गांव के अंदर की सड़क
- थ्रू रूट (TR)
- मेजर रूरल लिंक (MRL)
इसके अलावा सड़कों को मुख्य सड़क, क्रॉस रोड और अन्य सड़क जैसी श्रेणियों में भी बांटा जाएगा।
QR Code से मिलेगी पूरी जानकारी
सरकार प्रत्येक सड़क पर QR Code युक्त साइनबोर्ड लगाने की भी योजना बना रही है। इसे स्कैन करके सड़क की जानकारी, रखरखाव की स्थिति और अन्य विवरण ‘ग्राम मानचित्र’ प्लेटफॉर्म पर देखे जा सकेंगे।
सरकार का मानना है कि इस पहल से न केवल डिजिटल इंडिया अभियान को गति मिलेगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाओं की अंतिम छोर तक पहुंच (Last Mile Delivery) भी पहले से अधिक प्रभावी होगी। साथ ही सड़क निर्माण और रखरखाव से जुड़े रिकॉर्ड अधिक पारदर्शी होने से अनियमितताओं और संभावित भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है।





